सोनम वांगचुक के अनशन की अनदेखी कर सरकार क्रूरता कर रही : अभिजीत दीपके
पवनेश
- 15 Jul 2026, 09:59 PM
- Updated: 09:59 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 18वें दिन बुधवार को विभिन्न दलों के नेता उनसे मिलने पहुंचे। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत नहीं करने को लेकर सरकार को ''क्रूर'' बताया।
कॉजपा का मेडिकल की प्रवेश परीक्षा 'नीट' में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन 26वें दिन में प्रवेश कर गया। कॉजपा ने 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले बृहस्पतिवार को एक दिन की सामूहिक भूख हड़ताल की भी घोषणा की।
कॉजपा की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक अभी भी ''बहुत कमजोर'' हैं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं। वांगचुक का वजन घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। पिछले 24 घंटे में उनका वजन 400 ग्राम कम हुआ है। भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से अब तक उनका कुल वजन 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है।
मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनका रक्तचाप 105/76, रक्त शर्करा का स्तर 80 एमजी/डीएल और ऑक्सीजन संतृप्ति 97 प्रतिशत दर्ज की गई। शरीर में पानी का स्तर ठीक बताया गया है।
डॉक्टरों ने बताया कि वह होश में हैं और मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी की आवश्यकता है।
दीपके ने 'एक्स' पर लिखा, ''सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन है। जिस व्यक्ति ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए न्याय की मांग को लेकर अपनी जान दांव पर लगाने का फैसला किया, उसे सरकार की ओर से केवल चुप्पी मिली है। सरकार न केवल जवाबदेही से बच रही है, बल्कि वह क्रूर भी है।''
दीपके ने कहा कि जिन सवालों के जवाब मिलने चाहिए, वे ये हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बातचीत करने से क्यों इनकार कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अब तक जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया गया है।
उन्होंने कहा, ''यह पूछने के बजाय कि विपक्ष के नेता ने कॉजपा का समर्थन क्यों नहीं किया या कॉजपा की टीम का हर सदस्य सोनम सर के साथ भूख हड़ताल पर क्यों नहीं बैठा है, उन सवालों को पूछिए जो वास्तव में मायने रखते हैं।''
भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद, समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी और अजेंद्र सिंह लोधी, तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य डोला सेन, कांग्रेस के लोकसभा सदस्य प्रशांत यादवराव पडोले तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य संदोष कुमार जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया।
कॉजपा के अनुसार, सांसदों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि संसद के मानसून सत्र और 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में उनके मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने संसद मार्च का समर्थन किया और देश भर के छात्रों और युवाओं से इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।
आजाद ने कहा, ''यह तानाशाही कब तक चलेगी? प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री बात क्यों नहीं सुन रहे हैं? क्या यह सरकार सोनम वांगचुक की मौत का इंतजार कर रही है? मैं उनके साहस को सलाम करता हूं। अगर उन्हें कुछ भी होता है, तो सरकार ज़िम्मेदार होगी।''
कॉमेडियन कुणाल कामरा भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।
एक अलग मंच पर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) नेता नेहा, मनीष और आमीन ने स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद अपनी भूख हड़ताल जारी रखी।
मंगलवार और बुधवार को विभिन्न दलों के नेताओं समेत अलग-अलग क्षेत्र की हस्तियों ने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की।
भाषा आशीष पवनेश
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