मंत्रिमंडल ने एक करोड़ टन नई यूरिया क्षमता सृजित करने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी
अजय
- 15 Jul 2026, 05:51 PM
- Updated: 05:51 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) सरकार ने देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरक यूरिया के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (एनआईपीयू-2026) की बुधवार को घोषणा की। इसके तहत एक करोड़ टन उत्पादन क्षमता वाले आठ से नौ नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर इस नीति के तहत देश में गैस आधारित यूरिया विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
नया निवेश ढांचा संशोधनों के साथ वर्ष 2012 की नई निवेश नीति (एनआईपी) का विस्तारित स्वरूप है।
बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया कि यूरिया की मांग सालाना पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और आज मंजूर की गई नीति का उद्देश्य एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए, जिससे देश की आयात पर निर्भरता कम हुई। इस नीति के तहत आठ से नौ नए संयंत्र स्थापित होने से भारत यूरिया के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 की नई निवेश नीति (एनआईपी-2012) की तुलना में प्रमुख बदलावों में अधिक पारदर्शिता के लिए स्थिर और परिवर्तनीय लागत को अलग करना, इक्विटी पर प्रतिफल (आरओई) की व्यवहार्य सीमा तय करना, जो न्यूनतम 12 प्रतिशत और अधिकतम 16 प्रतिशत होगी, तथा चार वर्ष बाद प्रचलित विनिमय दर के आधार पर स्थिर लागत को रुपये में परिवर्तित कर विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करना शामिल है।
उर्वरक मंत्रालय ने बयान में कहा, ''इन उपायों से एनआईपीयू-2026 के तहत स्थापित प्रत्येक संयंत्र पर एनआईपी-2012 की तुलना में 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है।''
वैष्णव ने कहा कि देश घरेलू कमी को पूरा करने के लिए लगभग एक करोड़ टन यूरिया का आयात करता है। देश में सालाना यूरिया उत्पादन लगभग तीन करोड़ टन है, जबकि आवश्यकता चार करोड़ टन की है।
उन्होंने कहा कि फसल चक्र में बदलाव, बुवाई क्षेत्र बढ़ने और रिकॉर्ड उत्पादन के कारण यूरिया की मांग बढ़ रही है। नई नीति का उद्देश्य इस बढ़ती मांग के बीच यूरिया के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा कि उर्वरक मंत्रालय को यूरिया संयंत्र स्थापित करने के विभिन्न प्रस्ताव मिले हैं, इसलिए नई नीति की आवश्यकता महसूस की गई।
उन्होंने कहा, ''इस नीति के तहत निजी, सरकारी और सहकारी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहन समान होगा।''
अक्टूबर, 2019 में समाप्त हुई वर्ष 2012 की नई निवेश नीति (एनआईपी) के तहत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए थे। इनमें नामित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के संयुक्त उद्यमों द्वारा स्थापित चार संयंत्र और निजी कंपनियों द्वारा स्थापित दो संयंत्र शामिल हैं।
देश में वर्तमान में 33 यूरिया विनिर्माण इकाइयां परिचालन में हैं, जिनकी कुल पुनर्मूल्यांकित/स्थापित उत्पादन क्षमता 2.69 करोड़ टन है।
भाषा निहारिका अजय
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