मोबाइल फोन के लिए 62,500 करोड़ रुपये की दूसरी पीएलआई योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी
अजय
- 15 Jul 2026, 04:44 PM
- Updated: 04:44 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) के लिए 62,500 करोड़ रुपये के प्रावधान को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना और एक भारतीय फोन ब्रांड को विकसित करना है।
सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रोत्साहन आधारित इस नई योजना से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात और 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
वैष्णव ने कहा, "मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन की दूसरी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।"
उन्होंने संवाददाताओं को इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा, ''इसमें देश का एक अपना मोबाइल फोन ब्रांड विकसित करने का प्रावधान है। इसके तहत भारतीय मोबाइल फोन के लिए एक अलग परियोजना चलाई जाएगी।''
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, एमपीएमएस योजना के तहत पात्र बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि घरेलू स्रोतों से पुर्जों की खरीद और डिजाइन एवं शोध-विकास के लिए अतिरिक्त तीन प्रतिशत प्रोत्साहन का प्रावधान है।
योजना की तय अवधि में देश के भीतर मोबाइल उत्पादन लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार ने कहा कि इससे भारत की वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में स्थिति और मजबूत होगी।
पहले चरण की मोबाइल फोन पीएलआई योजना के तहत 125 करोड़ मोबाइल फोन का उत्पादन हुआ और कंपनियों को 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिए गए। वर्तमान में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माता बन चुका है।
सरकारी प्रयासों के चलते भारत में मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2019-20 में 2.14 लाख करोड़ रुपये का मोबाइल उत्पादन हुआ था जो बढ़कर 2024-25 में 5.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
इस दौरान मोबाइल फोन निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। भारत में बने मोबाइल फोन का निर्यात 27,000 करोड़ रुपये से कई गुना बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
कैलेंडर वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा है। इस दौरान देश से 2.62 लाख करोड़ रुपये के स्मार्टफोन का निर्यात हुआ, जिसमें आईफोन विनिर्माता एप्पल का दबदबा रहा।
सरकारी प्रोत्साहन से भारत वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन गया है। वर्ष 2014 में जहां देश मोबाइल फोन का आयातक था, वहीं अब भारत इसका शुद्ध निर्यातक बन चुका है। वर्तमान में देश में 300 से अधिक मोबाइल विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं।
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