एनसीपीआई को सर्वदलीय बैठक में बुलाए जाने की संभावना; सुदीप बंद्योपाध्याय होंगे सदन के नेता
दिलीप
- 14 Jul 2026, 10:25 PM
- Updated: 10:25 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए लोकसभा सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार एनसीपीआई के क्रमशः सदन के नेता और मुख्य सचेतक हो सकते हैं तथा इस संगठन को संसद के मानसून सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में बुलाये जाने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ये दोनों सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले और निचले सदन में पार्टी (एनसीपीआई) के 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था पर चर्चा की।
इन दोनों सांसदों ने पिछले महीने 18 अन्य सांसदों के साथ मिलकर तृणमूल नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी और फिर बाद में एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी।
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष के साथ बैठक के दौरान एनसीपीआई नेताओं ने नये संसद भवन में पार्टी कार्यालय के आवंटन पर भी चर्चा की।
एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों ने बिरला को बताया कि उन्होंने बंद्योपाध्याय को सदन का अपना नेता, शताब्दी रॉय को उप नेता और दस्तीदार को मुख्य सचेतक नियुक्त किया है।
यह बैठक संसद के मानसून सत्र से पहले और भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी के तौर पर एनसीपीआई को संसदीय मान्यता देने की प्रक्रिया के बीच हुई।
सूत्र ने बताया कि बंद्योपाध्याय ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।
सूत्रों ने बताया कि एनसीपीआई से कहा गया है कि वह राजग और नरेन्द्र मोदी सरकार को समर्थन देने वाला पार्टी का एक पत्र सौंपे।
एनसीपीआई के 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में भी शामिल होने की संभावना है।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला के साथ बंद्योपाध्याय और दस्तीदार की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले बिरला से मुलाकात कर संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल रोधी कानून) के तहत, 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी थीं।
बनर्जी ने अपनी याचिका में कहा था कि दूसरे दल में शामिल होकर इन सांसदों ने स्वेच्छा से तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से यह भी आग्रह किया था कि पार्टी के अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा नहीं दी जाए।
सूत्रों ने बताया कि सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में सांसदों को अयोग्य घोषित करने संबंधी याचिकाओं का मुद्दा नहीं उठा।
भाषा सुभाष दिलीप
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