कोयला हेराफेरी मामले में सीबीआई ने निजी कंपनी, अज्ञात रेलवे अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया
अविनाश
- 13 Jul 2026, 10:39 PM
- Updated: 10:39 PM
नागपुर, 13 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नागपुर के पास डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग से 28.80 लाख रुपये मूल्य के कोयले की कथित हेराफेरी मामले में एक ठेकेदार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के अज्ञात कर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सीबीआई की नागपुर स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने मेसर्स एस. जे. एंटरप्राइजेज, उसके मालिक अमित मैती, एसईसीआर के अज्ञात अधिकारियों और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
सीबीआई के अनुसार, एसईसीआर द्वारा 'बॉक्सएन वैगन', रेल पटरियों और माल शेड प्लेटफॉर्म की सफाई के लिए ठेका हासिल करने वाली एस. जे. एंटरप्राइजेज ने खारिज किये गए या बेकार सामग्री हटाने के नाम पर कोयला एकत्र किया।
जांच एजेंसी ने कहा कि बाद में कंपनी ने इस कोयले को खुले बाजार में बेच दिया, जिससे वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) को वित्तीय नुकसान हुआ।
सीबीआई तथा एसईसीआर और डब्ल्यूसीएल की सतर्कता टीमों ने इस साल 21 मई को डुमरी खुर्द रेलवे स्टेशन और साइडिंग पर संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान ठेकेदार को वैगन और पटरियों से कोयला एकत्र कर रेलवे परिसर में जमा करते हुए पाया गया।
अधिकारी ने बताया, "मौके पर करीब 1,427 मीट्रिक टन कोयला मिला। इसके नमूने लेकर सीएसआईआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीआईएमएफआर), नागपुर भेजे गए, जहां इसकी पुष्टि जी-12 ग्रेड कोयले के रूप में हुई।"
जांच में पता चला कि डब्ल्यूसीएल ने डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग पर कोयला प्रबंधन और सफाई कार्य के लिए पहले ही मेसर्स चड्ढा ट्रेडिंग कंपनी को नियुक्त किया था। यह साइडिंग डब्ल्यूसीएल ने एसईसीआर से पट्टे पर ले रखी है।
सीबीआई ने कहा, "इसके बावजूद एस. जे. एंटरप्राइजेज ने कथित रूप से डब्ल्यूसीएल की साइडिंग से कोयला उठाया। ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर एसईसीआर के अज्ञात अधिकारियों ने 21 और 24 मार्च को सामग्री को खारिज या बेकार कोयला बताकर 18 गेट पास जारी किए।"
जांच एजेंसी के अनुसार, इन गेट पास के आधार पर कंपनी ने कथित तौर पर 720 मीट्रिक टन जी-12 ग्रेड कोयला बाहर निकाला और खुले बाजार में बेच दिया।
सीबीआई के अनुसार, जी-12 ग्रेड का कोयला डब्ल्यूसीएल द्वारा बिजली उत्पादन कंपनियों को करीब 2,400 रुपये प्रति टन की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि इसका बाजार मूल्य 4,000 से 4,200 रुपये प्रति टन के बीच है।
सीबीआई ने कहा कि कोयले के इस कथित हेराफेरी से ठेकेदार को 28.80 लाख रुपये का अनुचित लाभ हुआ और डब्ल्यूसीएल को इतनी ही राशि का नुकसान हुआ।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
1307 2239 नागपुर