अंकित शर्मा के परिवार या ताहिर हुसैन के साथ न्याय नहीं हुआ: बचाव पक्ष के वकील
दिलीप
- 13 Jul 2026, 10:07 PM
- Updated: 10:07 PM
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने सोमवार को कहा कि अंकित शर्मा मामले में आया फ़ैसला किसी भी पक्ष की जीत नहीं है। इस फैसले में अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी की सनसनीखेज हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया।
पांडे ने कहा, ''ऐसे मामलों में सभी को नुकसान होता है।'' उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने दुख का सामना किया, और अब दोषी ठहराए गए आरोपी का परिवार भी दुख का सामना करेगा।
उन्होंने कहा कि इसमें समाज की हार हुई है और यह फ़ैसला किसी भी पक्ष की जीत नहीं है।
हुसैन की वकील तारा नरूला ने भी यह कहा कि ''अंकित शर्मा या उनके परिवार को और निश्चित रूप से ताहिर हुसैन को भी न्याय नहीं मिला''।
नरूला ने पीटीआई-भाषा से कहा, ''ज़ाहिर है कि हम निराश हैं, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि हमने मुकदमा बहुत अच्छी तरह से लड़ा। हमने गवाहों के बयानों को तोड़ा भी, और मुझे नहीं लगता कि आज न्याय हुआ है-न तो अंकित शर्मा या उनके परिवार के साथ, और निश्चित रूप से ताहिर हुसैन के साथ भी नहीं।''
उन्होंने कहा, ''बेशक, हम अपील दायर करेंगे।''
वकील ने कहा कि जिन छह लोगों को बरी किया गया है, ''उनका मामला बहुत मज़बूत था और निचली अदालत ने भी इसे माना था।''
उन्होंने कहा कि हुसैन निराश है।
वकील ने कहा, ''वह जानना चाहता है कि उसके साथ यह अन्याय क्यों हुआ, लेकिन हमारे पास उसके लिए कोई जवाब नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे हमारे पास अभी तक जनता के लिए भी कोई जवाब नहीं है, क्योंकि हमने अभी तक फ़ैसला नहीं देखा है।''
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने जब हुसैन को दोषी ठहराया, तो वह अदालत में रो पड़ा। उसके वकील ने उसे सांत्वना देने की कोशिश की।
शर्मा की हत्या के समय वह आम आदमी पार्टी (आप) का पार्षद था, लेकिन मामले में नाम आने के बाद पार्टी ने उसे निलंबित कर दिया था।
अदालत ने पाँच आरोपियों को दोषी ठहराया और छह अन्य को बरी कर दिया।
इसने हुसैन को भादंसं की धाराओं 302 (हत्या), 153ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 149 (दंगा करना), 355 (आपराधिक बल का इस्तेमाल करके हमला और हत्या - धारा 149 के साथ), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना) और 147 (दंगा करने की सज़ा) के तहत दोषी ठहराया।
हालांकि, हुसैन को भादंसं की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 109 (उकसाने के लिए सजा) - जिन्हें धारा 149 के साथ पढ़ा गया - के आरोपों से बरी कर दिया गया।
अदालत ने हत्या के आरोपों को छोड़कर बाकी समान आरोपों में नाज़िम, क़ासिम, जावेद और अनस को भी दोषी ठहराया।
इसने मामले में हसीन उर्फ़ मुल्लाजी उर्फ़ सलमान, फ़िरोज़, गुलफ़ाम, शोएब, समीर खान और मुंताज़िम उर्फ़ मूसा को बरी कर दिया।
यह मामला अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज प्राथिमिकी से जुड़ा है।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
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