लखनऊ पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया
पारुल
- 12 Jul 2026, 06:42 PM
- Updated: 06:42 PM
लखनऊ, 12 जुलाई (भाषा) लखनऊ पुलिस ने एक कथित अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों पर 'म्यूल' बैंक खातों के जरिये साइबर ठगी की रकम को चीन सहित अन्य देशों में भेजने और उसे क्रिप्टोकरेंसी (आभासी मुद्रा) में बदलने का आरोप है।
'म्यूल' बैंक खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराधी खाताधारक की जानकारी के बिना या कभी-कभी उसकी मिलीभगत से अवैध धन के लेन-देन या धनशोधन के लिए करते हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद शाहरुख (20), महफूज खान (19), सैयद अब्दुल्ला (22), मोहम्मद बसार (21), मोहम्मद रुबान (21), शब्बीर (27), सिकंदर (21), फरहान (26) और तुफैल के तौर पर हुई है।
उसने बताया कि मड़ियांव पुलिस थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, ये गिरफ्तारियां विभिन्न पोर्टल के जरिये पहचाने गए 'म्यूल' खातों की जांच-पड़ताल के दौरान हुईं।
उसने बताया कि आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा थे, जो अनजान और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और देशभर में साइबर धोखाधड़ी से मिली रकम इन खातों में मंगवाते थे।
पुलिस ने बताया कि उन्होंने 50 एटीएम/क्रेडिट कार्ड, तीन चेक बुक, दो पासबुक, एक टैबलेट, एक आईपैड, 53,100 रुपये नकद (जो साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसे माने जा रहे हैं) और धोखाधड़ी में इस्तेमाल की गई एक कार और एक मोटरसाइकिल जब्त की है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, गिरोह लोगों को बैंक खाता खुलवाने के लिए लालच देता था, फिर उनके एटीएम कार्ड, चेक बुक, इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारियां और मोबाइल नंबर हासिल कर उन खातों को 'म्यूल' अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल करता था।
जांचकर्ताओं के अनुसार, पैसे या तो नकद निकाले जाते थे या फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर उन डिजिटल वॉलेट में अंतरित कर दिए जाते थे, जिन्हें कथित तौर पर विदेशी साइबर अपराधी नियंत्रित करते थे।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी 'टेलीग्राम' के जरिये विदेश में बैठे आकाओं के संपर्क में थे और हर लेन-देन पर कथित तौर पर 'कमीशन' लेते थे।
पुलिस ने बताया कि गिरोह के बाकी सदस्यों की पहचान करने और इसके अंतर-राज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क का पता लगाने के लिए लेन-देन और 'टेलीग्राम' चैट की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
भाषा
चंदन आनन्द पारुल
पारुल
1207 1842 लखनऊ