तेलंगाना में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में नहीं, परिसीमन के बाद होगा : रेवंत रेड्डी
पवनेश
- 10 Jul 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
हैदराबाद, 10 जुलाई (भाषा) तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को दावा किया कि अगला विधानसभा चुनाव तय समय के अनुसार 2028 में नहीं, बल्कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद मई-जून 2029 में हो सकता है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद कांग्रेस 182 विधानसभा सीटों में से 117 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखेगी।
खम्मम जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि केंद्र में राजग सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि संसद के आगामी मॉनसून सत्र में परिसीमन विधेयक (जो अप्रैल में पारित नहीं हो सका था) पारित हो जाए।
उन्होंने जिले में, किसानों के लिए 'रायतू भरोसा' निवेश सहायता योजना के तहत निधि जारी की।
रेड्डी ने कहा, ''हम केंद्र में हो रही राजनीतिक गतिविधियों को देख रहे हैं। हमने देखा कि (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी और (गृह मंत्री) अमित शाह ने ममता बनर्जी की पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) और आम आदमी पार्टी में फूट डाली तथा अन्य पार्टियों को घुटने टेकने पर मजबूर किया। वे डरा-धमकाकर या दूसरों को झुकाकर अपनी मर्जी के मुताबिक सीटों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित कराने की कोशिश कर रहे हैं। हो सकता है कि वे इस गलत काम में कामयाब हो जाएं।'' उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में अगला विधानसभा चुनाव तय समय के अनुसार दिसंबर 2028 में नहीं, बल्कि मई-जून 2029 में होगा।
उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद तेलंगाना में विधानसभा की 119 सीटें बढ़कर 182 हो जाएंगी, जबकि राज्य में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 17 से बढ़कर 26 हो जाएगी।
रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस 117 से अधिक विधानसभा सीटें जीतकर तेलंगाना में दूसरी बार सरकार बनाएगी।
उन्होंने कहा कि वह इस महीने के आखिर में दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिलेंगे और उन्हें भरोसा दिलाएंगे कि 2029 के संसदीय चुनावों में कांग्रेस 20 लोकसभा सीट जीतेगी, ताकि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकें।
मुख्यमंत्री ने रैली में 'और एक बार - कांग्रेस सरकार' का नारा भी दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के परिवार को ''कौरव'' बताते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि कांग्रेस कार्यकर्ता तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक कि वे इस परिवार को तेलंगाना के राजनीतिक मानचित्र से मिटा नहीं देते।
भाषा सुभाष पवनेश
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