राजकोट गेम जोन में आग लगने के मामले में पांच अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है : नगर निगम
दिलीप
- 10 Jul 2026, 06:51 PM
- Updated: 06:51 PM
अहमदाबाद, 10 जुलाई (भाषा) राजकोट के टीआरपी गेम जोन में भीषण आग लगने से 27 लोगों की मौत होने के दो साल से अधिक समय बाद नगर निगम ने शुक्रवार को गुजरात उच्च न्यायालय को बताया कि उसने लापरवाही बरतने वाले आठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है और विभागीय जांच के बाद इनमें से पांच अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
राजकोट नगर निगम (आरएमसी) के उपायुक्त ने मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. राय की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में बताया कि 25 मई 2024 को हुई इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।
उपायुक्त ने बताया कि अधिकारियों में तत्कालीन सहायक नगर नियोजक और एक दमकल अधिकारी भी शामिल हैं, जिनकी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
आरएमसी ने यह हलफनामा इस घटना पर उच्च न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई सुनवाई के जवाब में दाखिल किया है। पच्चीस मई 2024 को गेम जोन में भीषण आग लगने से बच्चों समेत 27 लोगों की जलकर मौत हो गई थी।
नगर निगम ने बताया कि पांच अधिकारियों को बड़ी सजा के तहत नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है और उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।
इन अधिकारियों में तत्कालीन सहायक नगर नियोजक गौतम जोशी और मुकेश मकवाणा, तत्कालीन सहायक अभियंता जयदीप चौधरी और तत्कालीन दमकल अधिकारी रोहित विगोरा शामिल हैं।
हलफनामे में कहा गया है कि तत्कालीन सहायक नगर नियोजक राजेश मकवाणा को भी नगर निगम की सेवा से हटा दिया गया है।
नगर निगम ने बताया कि बाकी तीन अधिकारियों में से एक सेवानिवृत्त हो चुका है, जबकि अन्य दो के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई अभी लंबित है।
नगर निगम ने कहा कि तत्कालीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी इलेश खेर के खिलाफ बड़ी सजा का प्रस्ताव रखा गया है। चूंकि वह प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं, इसलिए इस पर अंतिम फैसला आरएमसी का सामान्य प्रशासन बोर्ड करेगा।
नगर निगम ने बताया कि तत्कालीन उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी भीखा थेबा के खिलाफ विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और अंतिम सजा तय करने से पहले उन्हें अंतिम नोटिस जारी किया जा रहा है।
हलफनामे में कहा गया है कि तत्कालीन नगर नियोजन अधिकारी मनसुख सगठिया 21 जून 2026 को सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के बाद सेवानिवृत्त चुके हैं। हालांकि, उनकी सेवानिवृत्ति विभागीय जांच के नतीजे और आदेश में तय शर्तों के अधीन रहेगी। उनके मामले की अगली सुनवाई अब 17 जुलाई को होगी।
आरएमसी ने यह हलफनामा उच्च न्यायालय के पिछले आदेश के जवाब में दाखिल किया है, जिसमें अदालत ने अनुशासनात्मक प्राधिकारी के अंतिम फैसले और लंबित विभागीय जांच की प्रगति के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप
1007 1851 अहमदाबाद