छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में करोड़ों रुपये की ऋण धोखाधड़ी, पांच गिरफ्तार
नेत्रपाल
- 09 Jul 2026, 06:04 PM
- Updated: 06:04 PM
कोंडागांव, नौ जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की पुलिस ने सरकारी स्कूलों के 43 शिक्षकों के साथ 10 से 12 करोड़ रुपये की ऋण धोखाधड़ी करने के आरोप में एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जिले के फरसगांव और केशकाल थाने की पुलिस की संयुक्त जांच के बाद संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की गई।
आरोपियों की पहचान शिवशंकर दास (40), दिलीप कुमार सोनी (45), वीरेंद्र तिर्की (44), श्यामसुंदर जांगड़े (33) और अंशुमान सिंह (28) के तौर पर हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अंबिकापुर, जशपुर और सारंगढ़ जिलों से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह शिक्षकों को अलग-अलग बैंकों से 'पर्सनल लोन' दिलाने का लालच देता था। पीड़ितों को बताया जाता था कि उन्हें मंजूर हुए ऋण की रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, जबकि बाकी 60 प्रतिशत हिस्सा आरोपी अपने पास रखेंगे। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया था कि पूरा ऋण दो से तीन साल के भीतर किस्त के जरिए चुका दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने वेतन पर्ची, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक ही समय में कई बैंकों से ऋण लिया।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में ऋण दिलाने के लिए बदले हुए पते वाले नकली आधार कार्ड भी बनाए और इस्तेमाल किए गए।
पुलिस ने बताया कि फरसगांव, बड़ेडोंगर, केशकाल और आस-पास के इलाकों के शिक्षकों द्वारा इस योजना के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाए जाने के बाद फरसगांव और केशकाल थाने में चार अलग-अलग मामले दर्ज कराए गए।
एसडीओपी अभिनव उपाध्याय और अरुण नेताम के नेतृत्व में गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बैंक खातों, ऋण से जुड़े दस्तावेजों और धन स्थानांतरित किए जाने की जांच की तथा तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपियों का पता लगाया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी अपने अन्य साथियों की मदद से यह गिरोह चलाते थे और आशंका है कि उन्होंने पिछले कई साल में जिलों के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षकों को अपना शिकार बनाया है। इस दौरान आरोपियों से मोबाइल फोन, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, बैंक पासबुक, चेक बुक, एटीएम कार्ड, डायरी और रजिस्टर जब्त किए गए।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में बैंक कर्मचारियों और ऋण एजेंटों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
भाषा सं संजीव शफीक नेत्रपाल
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