परिवार के बाहर अन्य व्यक्ति के पक्ष में होने वाले जीपीए 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' को भेजा जाए: मुख्यमंत्री
माधव
- 08 Jul 2026, 06:49 PM
- Updated: 06:49 PM
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में परिवार के बाहर उचित स्टांप शुल्क का भुगतान किए बिना जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के जरिए संपत्ति का हस्तांतरण नहीं होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा बुधवार को जारी बयान के मुताबिक, सगे संबंधियों के अलावा अन्य व्यक्ति के पक्ष में की गई जीपीए को उप पंजीयक द्वारा 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' के पास भेजना अनिवार्य होगा और वह 30 दिन में इस पर निर्णय लेंगे।
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने जीपीए के माध्यम से होने वाले संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच के लिए उप पंजीयकों को सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं।
गुप्ता ने कहा कि राजधानी में अचल संपत्तियों के पंजीकरण में राजस्व की चोरी को रोकने, भू-माफियाओं और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
उन्होंने कहा, "देखने में आया है कि कई मामलों में दस्तावेजों को केवल 'जीपीए' का नाम देकर नाममात्र की स्टांप शुल्क पर पंजीकृत करा लिया जाता है, जबकि उनके तहत संपत्ति की बिक्री, कब्जा सौंपने और मालिकाना हक हस्तांतरण करने जैसे प्रावधान भी शामिल होते हैं। यह सीधे तौर पर स्टांप शुल्क की चोरी है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा, बेटी, भाई और बहन जैसे सगे संबंधियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में निष्पादित किए जाने वाले जीपीए को उप पंजीयक सीधे पंजीकृत नहीं कर सकेंगे तथा ऐसे सभी मामलों को उचित स्टांप शुल्क के निर्धारण के लिए संबंधित 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' के पास भेजना अनिवार्य होगा।
गुप्ता ने बताया कि 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' को ऐसे प्रत्येक संदर्भ पर 30 दिनों के भीतर कारण सहित तर्कसंगत लिखित आदेश पारित करना होगा जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित दस्तावेज केवल सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी है या उस पर 'कन्वेयंस डीड' (बिक्री पत्र) के समान पूरा स्टांप शुल्क देय होगा।
उन्होंने कहा कि 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' के आदेश और उचित शुल्क के भुगतान के बिना ऐसी जीपीए का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार इन नियमों का उल्लंघन करते हुए मामले को 'कलेक्टर ऑफ स्टांप' को भेजे बिना ऐसी जीपीए का पंजीकरण करता है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
गुप्ता ने कहा कि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रत्येक उप पंजीयक कार्यालय में ऐसे मामलों का अलग रजिस्टर रखा जाएगा और उसकी मासिक रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने एक महीने के भीतर इन सभी मामलों की निगरानी के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग तंत्र विकसित करने के निर्देश भी दिए हैं।
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