हवाई अड्डों पर तस्करों की एआई आधारित 'प्रोफाइलिंग' मादक पदार्थ नियंत्रण दृष्टिपत्र का हिस्सा होगी
अविनाश
- 07 Jul 2026, 08:58 PM
- Updated: 08:58 PM
(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत' अभियान के तहत अधिक जोखिम वाले यात्रियों, मादक पदार्थों के तस्करों और तस्करी के नए तरीकों की पहचान करने के लिए हवाई अड्डों पर कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित यात्री 'प्रोफाइलिंग' प्रणाली लगाई जाएगी।
'प्रोफाइलिंग' का अर्थ पहचान, यात्रा के पैटर्न आदि के आधार पर किसी व्यक्ति से जुड़े जोखिम का आकलन करना है।
उच्च शिक्षण संस्थानों में भी चरणबद्ध तरीके से मादक प्रदार्थ की जांच करने वाली प्रणाली स्थापित की जाएगी। अगले तीन वर्षों में इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) और केंद्रीय एवं डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल होंगे, जिससे केंद्र सरकार से फंड पाने वाले 170 संस्थानों के 10 लाख से अधिक छात्र इसके दायरे में आएंगे।
ये रणनीतियां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ जारी अपनी तरह के पहले राष्ट्रीय प्रारूप ''मादक पदार्थ नियंत्रण 2026-2029 पर दृष्टि पत्र' का हिस्सा हैं।
'पीटीआई-भाषा' को 96 पेज का यह दस्तावेज़ मिला है, जिसमें कहा गया है कि इसे नशे के खिलाफ राष्ट्रीय लड़ाई और 'नशा मुक्त भारत' के सभी मुख्य पहलुओं को कवर करते हुए, मादक पदार्थ रोधी हितधारकों को 'स्पष्ट रणनीतिक दिशा' देने के लिए तैयार किया गया है।
यह प्रारूप को सभी हितधारकों के लिए एक 'काम करने योग्य और परिणामोन्मुख ढांचे' में बदल देगा, जिसमें केंद्रीय स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा।
कुल 41 निकायों (केंद्र सरकार के 39 मंत्रालयों और विभागों, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और उनके मादक पदार्थ रोधी कार्य बल ) को विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए समय-सीमा दी गई है ताकि 2029 तक देश में मादक पदार्थ की समस्या का अंत किया जा सके।
कार्ययोजना में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय जुलाई के आखिर तक एक 'समर्पित' प्रत्यर्पण पोर्टल शुरू करेगा, ताकि मार्च 2029 तक मादक पदार्थ संबंधी अपराध के बाद भारत से भागे 100 अपराधियों को वापस लाया जा सके।
हवाई अड्डे पर रोक-थाम की क्षमता को मज़बूत करने के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) मार्च 2027 तक एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित यात्री प्रोफाइलिंग और 'ट्रेंड' विश्लेषण प्रणाली शुरू करेगा।
दस्तावेज में कहा गया है कि इससे अधिक जोखिम वाले यात्रियों, मादक पदार्थ के तस्करों और तस्करी के नए तरीकों की पहचान करना आसान हो जाएगा।
इसमें कहा गया है कि यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि मादक पदार्थ से जुड़े गिरोह कोकीन, हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे महंगे मादक पदार्थों की तस्करी के लिए हवाई रास्ते का 'लगातार' इस्तेमाल कर रहे हैं।
उच्च शिक्षण संस्थानों में मादक पदार्थ संबंधी जांच को छात्रों के आरोग्य कार्यक्रम के तहत चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा, ताकि मादक पदार्थ का सेवन करने वाले छात्रों की जल्द पहचान करके उनकी काउंसलिंग की जा सके।
दस्तावेज में यह भी कहा गया कि देश की सीमा की रखवाली करने वाले सभी सुरक्षा बल (बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, असम राइफल्स, सीआईएसएफ) अपने-अपने संस्थानों में स्वतंत्र 'स्वापक प्रकोष्ठ' स्थापित करेंगे।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश
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