एनसीएलएटी ने फार्म2एनर्जी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को कायम रखा
अजय
- 07 Jul 2026, 02:22 PM
- Updated: 02:22 PM
नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने फार्म2एनर्जी के खिलाफ शुरू की गई दिवाला कार्यवाही को बरकरार रखते हुए कंपनी के निलंबित निदेशक की अपील खारिज कर दी है।
बायोमास गांठ (भूसा, पुआल आदि) की आपूर्ति के एक अनुबंध से संबंधित बकाया अग्रिम राशि के मामले में कंपनी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू की गई थी।
एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने लुधियाना स्थित फार्म2एनर्जी के निलंबित निदेशक मंडल के निदेशक सुखबीर सिंह की अपील खारिज करते हुए पहले से विवाद होने और 'वैध परिचालन ऋण' नहीं होने संबंधी उनकी दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि अपीलकर्ता (सिंह) द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए ई-मेल उनके द्वारा किए गए दावों के विपरीत हैं।
कंपनी के एक प्रतिनिधि ने 27 दिसंबर, 2022 के एक ई-मेल में बकाया देनदारी स्वीकार करते हुए भुगतान के लिए धन की व्यवस्था करने को अतिरिक्त समय मांगा था। इससे पहले से विवाद होने का दावा कमजोर पड़ता है।
एनसीएलएटी ने कहा, '' अपीलकर्ता इन ई-मेल के आधार पर पहले से विवाद को स्थापित करने में विफल रहा है। अन्यथा ऋण और चूक स्वीकार की गई है, इसलिए हमें एनसीएलटी के आदेश में कोई त्रुटि नहीं दिखती।''
एनसीएलएटी ने 22 पृष्ठ के अपने आदेश में सिंह को जारी कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में समाधान पेशेवर के साथ सहयोग करने का भी निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति एन. सेषासायी, न्यायमूर्ति अरुण बारोका और न्यायमूर्ति इंदेवर पांडे की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सिंह सीआईआरपी में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
यह विवाद जुलाई, 2022 में फार्म2एनर्जी और वर्बियो इंडिया के बीच 4.4 करोड़ रुपये मूल्य की 20,000 टन धान बायोमास गांठों (बेल्स) की आपूर्ति के समझौते से उत्पन्न हुआ।
वर्बियो इंडिया ने कुल अनुबंध मूल्य का 35 प्रतिशत यानी 1.54 करोड़ रुपये अग्रिम के रूप में दिए थे। हालांकि, फार्म2एनर्जी 15 दिसंबर, 2022 तक की निर्धारित अवधि में तय आपूर्ति पूरी करने में विफल रही।
जनवरी, 2023 में कानूनी नोटिस और उसके बाद दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा-8 के तहत वैधानिक मांग नोटिस जारी करने के बाद वर्बियो इंडिया ने नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 1.19 करोड़ रुपये की चूक का दावा करते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की चंडीगढ़ पीठ का रुख किया।
एनसीएलटी ने नौ सितंबर, 2024 को धारा-9 के तहत याचिका स्वीकार करते हुए कंपनी के खिलाफ सीआईआरपी शुरू करने का आदेश दिया।
सिंह ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि कथित बकाया राशि आईबीसी के तहत ''परिचालन ऋण'' की श्रेणी में नहीं आती, मांग नोटिस का विधिवत तामील नहीं हुआ और बायोमास गांठ की गुणवत्ता को लेकर पहले से विवाद होने के कारण दिवाला याचिका स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी दलील दी थी कि इस कार्यवाही से पंजाब और हरियाणा में कंपनी के मौसमी कृषि परिचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
भाषा निहारिका अजय
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