मोर पंख विवाद: पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने मेनका गांधी का समर्थन किया
सुरेश
- 05 Jul 2026, 08:57 PM
- Updated: 08:57 PM
(कोमल शर्मा)
नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की उस अपील को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने जैन समुदाय से मोर के पंखों से बनी 'पिच्छी' (मयूरपुच्छ) का इस्तेमाल बंद करने का आग्रह किया है।
पशु अधिकारों के लिए काम करने वालीं मेनका गांधी का दावा है कि इसकी (मयूरपुच्छ की) मांग अवैध वन्यजीव तस्करी को बढ़ावा देती है।
इसपर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जैन समुदाय के सदस्यों ने गांधी के आरोपों को ''पूरी तरह गलत'' बताया और कहा कि उनके खिलाफ देश के कई हिस्सों में पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
सदस्यों ने कहा कि मोर या किसी भी अन्य जीव को मारना जैन धर्म के मूल सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है, क्योंकि जैन धर्म का आधार अहिंसा है।
कई पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने हालांकि मेनका का समर्थन करते हुए कहा कि मोर के पंखों के व्यापक ''संगठित अवैध कारोबार'' को देखते हुए उनकी चिंताएं वाजिब हैं।
'पिच्छी' मोर के पंखों से बनी झाड़न जैसी एक पवित्र वस्तु होती है, जिसका उपयोग जैन मुनि, विशेषकर दिगंबर संप्रदाय के मुनि, कीट-पतंगों को धीरे से हटाने और उन्हें नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए करते हैं।
मेनका ने पिछले सप्ताह जैन समुदाय से मोर के पंखों से बनी 'पिच्छी' का इस्तेमाल बंद करने का आग्रह किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मोर के पंखों के कारोबार के कारण लाखों मोरों को मारा गया है।
मेनका ने कहा था, ''मैं यह नहीं कह रही हूं कि जैन समुदाय ने मोरों को मार डाला है, लेकिन उन्होंने इसके लिए रास्ता खोल दिया और एक बार रास्ता खुल जाने के बाद... 15 से 25 लाख मोरों की जान चली गई।''
उन्होंने जैन मुनियों से मोर के पंखों से बनी 'पिच्छी' की जगह रस्सी या अन्य गैर-पशु सामग्री से बने विकल्प अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, ''श्वेतांबर जैन भी पिच्छी रखते हैं, लेकिन उनकी पिच्छी रस्सी से बनी होती है।''
जैन समुदाय के सदस्यों ने दावा किया कि उन्होंने (मेनका गांधी) जैन धर्म और उसकी धार्मिक परंपराओं की पर्याप्त जानकारी के बिना सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने रविवार को 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि केवल जैन समुदाय को निशाना बनाना ''पूरी तरह गलत'' है, जबकि विभिन्न राज्यों में अनेक पारंपरिक लोक नृत्यों और सांस्कृतिक परंपराओं में भी मोर के पंखों का इस्तेमाल किया जाता है।
संजय ने कहा कि इस मुद्दे पर संगठन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है और जैन समुदाय के सदस्यों ने भी देश के विभिन्न हिस्सों में मेनका गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई हैं।
उन्होंने कहा, ''संगठन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है और कई प्राथमिकी तथा पुलिस शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।''
संजय ने कहा, ''यह कहना कि जैन समुदाय की वजह से मोरों को मारा जा रहा है, पूरी तरह गलत है। जैन मुनि मोर के पंखों से बनी पिच्छी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक नृत्यों और अन्य सांस्कृतिक परंपराओं में भी मोर के पंखों का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसका संबंध केवल जैन समुदाय से जोड़ना गलत है।''
मेनका ने आरोप लगाया था कि मोर के पंखों की बिक्री की अनुमति दिए जाने से ''एक बहुत बड़ा उद्योग'' खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा था, ''मोर के पंखों का बाजार खुल गया। इसके बाद बहुत बड़े पैमाने पर कारोबार शुरू हो गया। पंख इतने सुंदर होते हैं कि तस्कर, डिजाइनर और कारोबारी इससे जुड़ गए और लोगों ने फूलों की जगह मोर के पंख बेचने शुरू कर दिए।''
मेनका ने दावा किया था, ''जनपथ में ऐसी कई दुकानें हैं, जहां मोर के पंख बेचे जाते हैं... ये पंख केवल मोर को मारने के बाद ही मिलते हैं।''
दिगंबर जैन समाज सेवा ट्रस्ट के नेतृत्व में दिगंबर जैन समुदाय के सदस्यों ने शुक्रवार को कर्नाटक के शिवमोगा में विरोध प्रदर्शन किया था।
पशु अधिकार संगठन 'पेटा इंडिया' ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मोरों को कोई पीड़ा न हो, उनके पंख उन्हीं पर रहने दिए जाएं।
पेटा इंडिया ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''मोर के पंखों की मांग के कारण मोर पीड़ा झेल रहे हैं और जब तक यह मांग बनी रहेगी, तब तक ऐसे कारोबारी भी रहेंगे जो पक्षियों के पंख नोचेंगे और उन्हें मार डालेंगे। सबसे सुरक्षित और संवेदनशील विकल्प यह है कि मोर के पंखों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया जाए और उनकी जगह पशुओं से प्राप्त न होने वाले मानवीय विकल्प अपनाए जाएं।''
संगठन ने इस दावे को खारिज कर दिया कि व्यावसायिक मांग की पूर्ति स्वाभाविक रूप से झड़े हुए मोर के पंखों से की जा सकती है।
इसने कहा, ''मोर के पंखों की किसी भी तरह की मांग अवैध वन्यजीव तस्करों को इसकी आपूर्ति करने के लिए प्रोत्साहित करती है। प्राकृतिक रूप से झड़े हुए पंखों से इस मांग को पूरा करना असंभव है।''
लाखों मोरों के मारे जाने संबंधी मेनका के दावे पर पेटा इंडिया ने कहा, ''हां, क्योंकि यह कारोबार अवैध है, इसलिए इसके आधिकारिक आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन बाजार में मोर के पंखों से बने उत्पादों की भारी संख्या को देखकर इसका अनुमान लगाया जा सकता है।''
सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए इसने कहा, ''मोर के पंखों की बिक्री की किसी भी तरह की अनुमति देना अवैध वन्यजीव तस्करों के लिए मांग पूरी करने हेतु पक्षियों के पंख नोंचने और उन्हें प्रताड़ित करने का रास्ता पूरी तरह खोल देता है।''
दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड की कार्यकारी समिति के सदस्य आशेर जेसुदॉस ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि मेनका गांधी की टिप्पणियों ने उस मुद्दे को सामने रखा है, जिसे पशु कल्याण संगठन वर्षों से उठाते रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''हम हमेशा से यह बात जानते हैं कि यह एक आम प्रथा है और हम लगातार लोगों से मोर के पंखों का इस्तेमाल बंद करने की अपील करते रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि मोर के पंखों की मांग अवैध कारोबार को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा, ''हमारे सामने आए मामलों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि मोर के पंखों का संगठित अवैध कारोबार चल रहा है। पंखों का यह कारोबार और उनकी व्यापक उपलब्धता को केवल इस आधार पर नहीं समझाया जा सकता कि लोग जंगलों से प्राकृतिक रूप से झड़े हुए पंख इकट्ठा कर रहे हैं।''
भाषा देवेंद्र सुरेश
सुरेश
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