अलगाववादियों का 'महिमामंडन' करने वाली पुस्तकों पर विवाद : आठ अफसर निलंबित, जांच के आदेश
माधव
- 04 Jul 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
जम्मू, चार जुलाई (भाषा) जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को ''बेहद आपत्तिजनक सामग्री'' वाली दो विवादित किताबों की जांच के आदेश दिए और इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया तथा एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी।
यह कार्रवाई भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों द्वारा इस पुस्तक पर यह आरोप लगाए जाने के बाद की गई कि इसमें कथित तौर पर अलगाववाद का 'महिमामंडन' किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश में कहा गया है कि दोनों पुस्तकों को शुक्रवार को वापस ले लिया गया।
विवादित पुस्तक ''पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जेएंडके'' के लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं तथा इसे ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू ने प्रकाशित किया है तथा ''ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर'' के लेखक सुशांत गिरी हैं तथा इसे अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है।
आदेश के अनुसार, पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में तथा दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में भेजी गई थीं।
आदेश में कहा गया है, ''विभाग के संज्ञान में आया है कि इन पुस्तकों में अत्यंत अनुचित सामग्री है। यह स्पष्ट है कि उप-समिति सीरीज-4 के सदस्यों और पर्यवेक्षी अधिकारियों ने ऐसी पुस्तकों की अनुशंसा करते समय गंभीर लापरवाही, कर्तव्य में चूक और आवश्यक सावधानी बरतने में विफलता दिखाई, जिनमें अलगाववाद से संबंधित ऐसी सामग्री थी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।''
आदेश में कहा गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए उप-समिति के सदस्य ऐसी गंभीर चूक और लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार लगते हैं जो सरकारी कर्मचारियों के लिए उचित नहीं है।
इसमें कहा गया है कि इसलिए जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के नियम 31(1)(ए) के तहत स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों और पर्यवेक्षी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबित अधिकारियों की पहचान फाजिल इमरान सिद्दीकी (समन्वयक, पुस्तकालय, समग्र शिक्षा), गुरजीत सिंह (सहायक समन्वयक, समग्र शिक्षा), संजीव शर्मा (प्रधानाचार्य, जीएचएसएस, कोरे पन्नू), शाजिया कौसर (अकादमिक अधिकारी, एससीईआरटी जम्मू), इम्तियाज अहमद मीर (व्याख्याता, बीएचएसएस वाथूरा, बडगाम), निरंजन शर्मा (व्याख्याता, जीएचएसएस बधात, किश्तवाड़), रेणु मेंगी (व्याख्याता, डीआईईटी जम्मू) और राजमोहिनी (व्याख्याता, जीजीएचएसएस, पुंछ) के रूप में की गई है।
आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान ये सभी अधिकारी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक विभाग से संबद्ध रहेंगे।
आदेश में यह भी कहा गया है कि शेख सुहैल अहमद, जो समग्र शिक्षा में पुस्तकालय समन्वयक की सहायता के लिए संविदा पर कंप्यूटर सहायक के रूप में कार्यरत थे, उनकी संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है।
उपराज्यपाल ने इस पूरे मामले की जांच के भी आदेश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है, ''मामले की गंभीरता और उपर्युक्त अधिकारियों के कदाचार को देखते हुए विद्युत विकास विभाग के वित्तीय आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव) अश्विनी कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जो पूरे मामले की जांच करेंगे।''
इसके अलावा, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा को इस मामले में 'प्रेजेंटिंग' अधिकारी नियुक्त किया गया है।
'प्रेजेंटिंग' अधिकारी वह होता है जो विभागीय जांच में सरकार या विभाग का पक्ष प्रस्तुत करता है।
आदेश के अनुसार, जांच अधिकारी 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपेंगे।
उपराज्यपाल ने यह भी आदेश दिया कि उपर्युक्त दोनों पुस्तकों के लेखकों और प्रकाशकों को जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित और काली सूची में डाल दिया जाए। साथ ही, उनके द्वारा लिखित या प्रकाशित किसी भी मुद्रित सामग्री को भी जम्मू कश्मीर से वापस लिया जाएगा।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विभिन्न राजनीतिक दलों ने इन पुस्तकों की सामग्री पर आपत्ति जताई।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि किताबों में आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन किया गया है और उसने किताबों पर प्रतिबंध लगाने तथा जम्म्ू कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू को बर्खास्त करने की मांग की है।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस मामले को केवल शैक्षणिक चूक नहीं, बल्कि आपराधिक मामला बताते हुए आरोप लगाया कि यह ''शैक्षणिक जिहाद'' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल कर पाकिस्तान प्रायोजित विमर्श को बढ़ावा देना और युवाओं के मन में अलगाववाद का जहर घोलना है।
शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक ''दोषियों, हत्यारों, आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन करती है।''
भाजपा नेता ने कहा, ''यह बेहद खेदजनक है कि जम्मू कश्मीर शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा अभियान के 'लोगो' के साथ इस पुस्तक को स्कूलों में वितरित किया। यह एक गंभीर अपराध है।''
उन्होंने आरोप लगाया कि ये प्रकाशन राष्ट्र-विरोधी विमर्श को बढ़ावा देते हैं और इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस ने समग्र शिक्षा मिशन के तहत जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूलों में कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों का महिमामंडन करने वाली विवादित पुस्तक वितरित किए जाने के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) ने पुस्तकों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
जेकेपीसीसी के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने यहां जारी एक बयान में कहा, ''ऐसे कृत्य के लिए कोई जगह नहीं है…...यदि इस पुस्तक में, जैसा कि पता चल रहा है, आपत्तिजनक सामग्री है, तो यह पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच करायी जानी चाहिए कि किन लोगों ने इस पुस्तक को स्कूलों और सरकारी संस्थानों तक पहुंचाने की अनुमति दी।''
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''इस पुस्तक के प्रकाशन के पीछे की साजिश का पर्दाफाश होना चाहिए।''
जम्मू में जम्मू कश्मीर पीपुल्स फोरम (जेकेपीएफ) ने भी दावा किया कि इन किताबों में अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों को जम्मू कश्मीर की ''महान हस्तियों'' और ''दिग्गजों'' के तौर पर दिखाकर उनका महिमामंडन किया गया है।
भाषा गोला माधव
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