सीजेपी आंदोलन: वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, पार्टी ने पुलिस पर हमले का आरोप लगाया
सुरेश
- 02 Jul 2026, 11:19 PM
- Updated: 11:19 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली के जंतर मंतर पर बृहस्पतिवार को भूख हड़ताल के पांचवें दिन कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ गई और उनका रक्त शर्करा का स्तर गिरकर 60 पर पहुंच गया, जबकि रक्तचाप भी निम्न रहा।
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर पुस्तकालय स्थापित करने का प्रयास कर रहे छात्रों पर हमला किया।
सीजेपी के आंदोलन को बृहस्पतिवार को भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव और आरटीआई कार्यकर्ता निखिल डे का भी समर्थन मिला।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देते हुए 'एक्स' पर लिखा कि उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है।
दीपके ने आगाह किया कि अगर वांगचुक को कुछ हुआ तो उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
उन्होंने लिखा, "सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। उनका शुगर लेवल गिरकर 60 रह गया है और रक्तचाप भी बहुत कम है। यदि सोनम सर को कुछ भी होता है तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।"
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग भी दोहराई।
दीपके ने "कॉकरोचों के साथ चाय पर चर्चा" के नाम से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह जानना था कि "हम इस आंदोलन को और बेहतर तथा बड़ा कैसे बना सकते हैं"।
बाद में दिन में दीपके ने 'एक्स' पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने प्रदर्शन स्थल पर एक पुस्तकालय स्थापित करने की कोशिश कर रहे दो युवकों के साथ मारपीट की और छत्रपति शिवाजी महाराज तथा भगत सिंह पर आधारित पुस्तकों समेत कई किताबें फेंक दीं।
उन्होंने एसीपी अजय शर्मा को निलंबित करने की मांग की और आरोप लगाया कि अधिकारी ने उन दो ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का अपमान किया है।
उन्होंने यह सवाल भी किया कि पुलिस ने उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की, "जो केवल यह चाहते थे कि लोग प्रदर्शन स्थल पर किताबें पढ़ें।"
दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में पुलिस ने छात्रों से इस बात का सबूत मांगा कि उनके साथ मारपीट की गई थी।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो भी बृहस्पतिवार को प्रदर्शन स्थल पहुंचीं।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) से जुड़े छह छात्र भी प्रदर्शन स्थल पर अलग मंच से अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखे हुए हैं।
एक दिन पहले आइसा ने कहा था कि अनशन कर रहे छात्रों की सेहत बिगड़ रही है। संगठन का दावा है कि जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव दानिश का रक्त शर्करा स्तर गिरकर 61 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया है, जबकि आमीन और दीपक कुमार वर्मा को भी चिकित्सकों ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण अनशन जारी न रखने की सलाह दी है।
सभा को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह प्रदर्शन भारत के युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। उन्होंने सत्तावाद के खिलाफ व्यापक एकजुटता का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, "हम इस्तीफा इसलिए नहीं मांग रहे हैं कि हमें यह पसंद है। हम इस्तीफा इसलिए मांग रहे हैं, क्योंकि जवाबदेही भी होनी चाहिए।"
भट्टाचार्य ने पूर्व रेल मंत्रियों -लाल बहादुर शास्त्री और नीतीश कुमार- द्वारा नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अतीत में दिए गए इस्तीफों का जिक्र किया और कहा, "अब रेल मंत्री 'रील मंत्री' बन गए हैं।"
व्यापक एकजुटता की अपील करते हुए उन्होंने कहा, "आज हमें ऐसी एकजुटता की जरूरत है, जिसमें जलवायु के लिए लड़ने वाले लोग युवाओं के साथ खड़े हों, युवा मजदूरों के साथ खड़े हों, मजदूर किसानों के साथ खड़े हों और हम सभी मिलकर सत्तावाद के खिलाफ खड़े हों।"
सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता निखिल डे भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और कहा कि उन्होंने सूचना का अधिकार कानून और रोजगार गारंटी कानून के अभियान के दौरान जंतर-मंतर पर कई रातें बिताई थीं।
उन्होंने कहा, "जंतर-मंतर जनता की संसद है। लोग सड़कों पर सिर्फ एक बात कह रहे हैं - हमारी आवाज सुनिए।"
पिछले कुछ दिनों में इस प्रदर्शन को कई राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों का समर्थन मिला है। प्रदर्शन स्थल पर आने वालों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी, माकपा की वरिष्ठ नेता बृंदा करात, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, उच्चतम न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण, भाकपा नेता एनी राजा, कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज तथा तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष शामिल हैं।
सीजेपी का यह प्रदर्शन 20 जून को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ था।
भाषा जोहेब सुरेश
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