विनिवेश ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में बजट लक्ष्य का 31 प्रतिशत राजस्व जुटाया
अजय
- 02 Jul 2026, 07:03 PM
- Updated: 07:03 PM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण की रफ्तार तेज कर दी है और पहली तिमाही में ही समूचे वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का करीब 31 प्रतिशत जुटा लिया है।
यह किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिवेश प्रक्रिया की अब तक की सबसे तेज प्रगति मानी जा रही है।
सरकार मई के मध्य से जून के बीच लगभग हर सप्ताह सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने के लिए बिक्री पेशकश (ओएफएस) लेकर आई। इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के छह प्रतिष्ठानों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने कुल 18,561 करोड़ रुपये जुटाए।
यह हिस्सेदारी बिक्री सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जीआईसी और आईआरएफसी में की गई।
इसके अलावा, अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के जरिये परिसंपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने से भी 6,367 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
इस तरह विनिवेश एवं मौद्रीकरण के जरिये अब तक कुल 24,928 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 80,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने आगे भी सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों के विनिवेश की रूपरेखा तैयार कर ली है और उम्मीद है कि वह तय लक्ष्य को पार कर सकती है।
इस साल का सबसे बड़ा विनिवेश भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में हो सकता है। सरकार की एलआईसी में हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत है, जिसे मई, 2027 तक घटाकर 90 प्रतिशत करना अनिवार्य है। इससे पहले मई, 2022 में सरकार ने एलआईसी में 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 20,500 करोड़ रुपये जुटाए थे।
इसके अलावा आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश पर भी काम जारी है। इस दिशा में पहला प्रयास नाकाम रहने के बावजूद सरकार नई बोलियां आमंत्रित कर इस प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी में है।
विनिवेश के मोर्चे पर सरकार की यह सक्रियता बढ़ते राजकोषीय दबाव के बीच सामने आई है। पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा और उर्वरक आयात महंगा होने से सब्सिडी खर्च बढ़ने की आशंका है।
चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में ही राजकोषीय घाटा 1.62 लाख करोड़ रुपये, यानी वार्षिक लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
मई तक शुद्ध कर राजस्व जहां सालाना लक्ष्य का 12.1 प्रतिशत रहा, वहीं गैर-कर राजस्व (जैसे विनिवेश) 17 प्रतिशत तक पहुंच गया। दूसरी ओर, राजस्व और पूंजीगत व्यय क्रमशः 15.3 प्रतिशत और 20.5 प्रतिशत रहा।
सरकार के सामने उर्वरक सब्सिडी के लगभग दोगुना होकर तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने और कच्चे तेल के आयात बिल बढ़ने की चुनौती है। साथ ही, अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून पर पड़ने वाले असर की भी चिंता है।
ऐसे में 4.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने के लिए विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से होने वाली आय अहम भूमिका निभाएगी।
पिछले वर्षों में सरकार कई बार विनिवेश लक्ष्य हासिल कर पाने में नाकाम रही है। वित्त वर्ष 2021-22 में 78,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 13,534 करोड़ रुपये और 2022-23 में 50,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 35,294 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके थे।
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