फुटबॉल के साथ लुचा लिब्रे भी बना फुटबॉल विश्व कप का बड़ा आकर्षण
सुधीर
- 02 Jul 2026, 12:55 PM
- Updated: 12:55 PM
मेक्सिको सिटी, दो जुलाई (एपी) फुटबॉल के साथ-साथ मेक्सिको की विश्वप्रसिद्ध लुचा लिब्रे (मुखौटा कुश्ती) भी विश्व कप देखने पहुंचे पर्यटकों के लिए सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल हो गई है।
रंग-बिरंगे मुखौटे पहने पहलवानों से सजी सड़कें और खचाखच भरे अखाड़े इस पारंपरिक खेल की लोकप्रियता का प्रमाण हैं। दुनिया भर से आए फुटबॉल प्रशंसक मेक्सिको की इस प्रतिष्ठित सांस्कृतिक विरासत के रंग में पूरी तरह रंगते नजर आ रहे हैं।
फुटबॉल के साथ-साथ लुचा लिब्रे भी मेक्सिको की राष्ट्रीय पहचान और जुनून का अभिन्न हिस्सा है। कुश्ती के अखाड़ों में प्रवेश करते ही दर्शक कुछ घंटों के लिए फुटबॉल विश्व कप का रोमांच भूलकर एक अलग ही दुनिया में पहुंच जाते हैं।
ग्वाडलाहारा में जब स्पेन और उरुग्वे के बीच रोमांचक मुकाबला चल रहा था, उसी समय हजारों दर्शक प्रतिष्ठित एरेना मेक्सिको में मिस्टिको और मास्कारा दोरादा की जोड़ी तथा द बीस्ट मोर्टोस और सैमी ग्वेरा के बीच हुए शानदार मुकाबले का आनंद ले रहे थे। एरेना मेक्सिको को लुचा लिब्रे का 'कैथेड्रल' भी कहा जाता है।
इंग्लैंड के मैनचेस्टर निवासी एंडी विंस्टन अपने परिवार के साथ कनाडा, अमेरिका और अब मेक्सिको में विश्व कप देखने पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा, ''यह अनुभव शानदार रहा। मेक्सिको आकर लुचा लिब्रे देखे बिना यात्रा अधूरी रहती। यह यहां की महान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर है।''
दर्शक दीर्घा में इंग्लैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, कोलंबिया, स्पेन और मेक्सिको सहित कई देशों की टीमों की जर्सी पहने प्रशंसक अपने पसंदीदा पहलवानों का उत्साहवर्धन करते दिखाई दिए।
ब्राजील के हेनरिक नूनेस दोस सैंटोस ने कहा, ''यह रात मेरी कल्पना से कहीं बेहतर रही। यहां का रोमांच इतना जीवंत है कि सब कुछ वास्तविक लगता है। पूरे माहौल में अद्भुत ऊर्जा है।''
मेक्सिकन लुचा लिब्रे की शुरुआत 20वीं सदी के प्रारंभ में हुई थी। इसकी शैली में अमेरिकी कुश्ती और ग्रीको-रोमन कुश्ती की तकनीकों के साथ हवाई करतब और नाटकीय प्रस्तुति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। समय के साथ इसने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और मेक्सिको की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन गई। वर्ष 2018 में इसे मेक्सिको सिटी की सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया।
मुखौटे की आड़ में पहलवान अपनी वास्तविक पहचान गुप्त रखते हैं और राष्ट्रीय प्रतीक का रूप ले लेते हैं। यही कारण है कि अधिकांश पहलवान अपने असली नाम सार्वजनिक नहीं करते।
तीस वर्षीय पहलवान स्टार ब्लैक ने कहा, ''लुचा लिब्रे ही मेरा जीवन है। बचपन में मैं अपने दादा-दादी के साथ मुखौटे बेचता था। धीरे-धीरे मुझे इन मुखौटों, केप, हवाई करतबों और कुश्ती की शैली से प्रेम हो गया और फिर मैंने प्रशिक्षण लेने का निर्णय किया।''
वैसे तो लुचा लिब्रे पहले से ही मेक्सिको आने वाले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय थी, लेकिन विश्व कप के आयोजन ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। अब मुखौटे और कुश्ती की झलक केवल अखाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़कों और स्टेडियमों के आसपास भी दिखाई देने लगी है।
मेक्सिको के राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय में लुचा लिब्रे के विशेषज्ञ जोस एंजेल गार्फियास फ्रियास के अनुसार, अन्य मेजबान देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम खर्च होने के कारण अनेक विदेशी पर्यटक मेक्सिको में ठहर रहे हैं और यहां से अन्य मेजबान देशों में अपनी टीमों के मुकाबले देखने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''पहले भी लुचा लिब्रे लोकप्रिय थी, लेकिन विश्व कप के दौरान अखाड़े पहले से कहीं अधिक भरे हुए हैं। विदेशी पर्यटक अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीमों की जर्सी पहनकर मुकाबले देखने पहुंच रहे हैं।''
स्टेडियमों के बाहर अब राष्ट्रीय झंडों के साथ-साथ लुचा लिब्रे के मुखौटे भी बड़ी संख्या में बिकते दिखाई देते हैं। हालांकि फीफा के सुरक्षा नियमों के तहत स्टेडियमों के भीतर मुखौटे पहनने की अनुमति नहीं है, फिर भी कुछ प्रशंसक इन्हें पहनकर अंदर जाते देखे गए।
एपी
आनन्द सुधीर
सुधीर
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