ईपीएफओ की नई योजनाओं में डिजिटल अनुपालन एवं दावों के समयबद्ध निपटान पर रहेगा जोर
वैभव
- 02 Jul 2026, 12:45 PM
- Updated: 12:45 PM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) संचालित नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में डिजिटल अनुपालन और भविष्य निधि (पीएफ) निकासी तथा पेंशन निर्धारण जैसे दावों के समयबद्ध निपटान पर विशेष जोर रहेगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026, कर्मचारी पेंशन योजना, 2026 और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना, 2026 को अधिसूचित कर दिया है।
मंत्रालय ने नई योजनाओं में ईपीएफओ अधिकारियों द्वारा भविष्य निधि निकासी, पेंशन तथा समूह बीमा संबंधी दावों का 20 दिन के भीतर निपटान नहीं करने पर 12 प्रतिशत की दर से वार्षिक दंडात्मक ब्याज का सख्त प्रावधान किया है।
नई योजनाओं में कहा गया, ''यदि आयुक्त बिना उचित कारण के सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद किसी दावे का 20 दिन के भीतर निपटान नहीं करते हैं, तो उक्त अवधि के बाद हुई देरी के लिए आयुक्त जिम्मेदार होंगे। लाभ राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकता है, जिसे आयुक्त के वेतन से काटा जाएगा।''
नई योजनाएं कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971, कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना, 1976 का स्थान लेंगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पहले की योजनाओं में भी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दावों के निपटान में देरी होने पर दंडात्मक ब्याज का प्रावधान था।
उन्होंने बताया कि पहले संबंधित अधिकारियों को भविष्य निधि जमा पर घोषित ब्याज दर के बराबर राशि देनी होती थी, जबकि अब इसे 12 प्रतिशत वार्षिक की निश्चित दर पर तय कर दिया गया है।
अधिकारी ने साथ ही स्पष्ट किया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के अंशदान के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
नियोक्ता और कर्मचारी दोनों पहले की तरह मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान देते रहेंगे।
नियोक्ता के 12 प्रतिशत अंशदान में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में जाएगा जबकि केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत की सब्सिडी देगी।
उन्होंने कहा कि हालांकि, नई योजनाओं में नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि सदस्य बिना किसी देरी के सभी सेवाओं का ऑनलाइन तथा निर्बाध तरीके से लाभ उठा सकें।
नई योजनाओं के तहत ईपीएफओ द्वारा विनियमित छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों या भविष्य निधि न्यासों को भी अपने सदस्यों के लिए दावों और अन्य आवेदनों की ऑनलाइन दस्तावेज जमा (ई-फाइलिंग) कराने की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
भाषा निहारिका वैभव
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