रायबरेली संयंत्र में उत्पादन प्रभावित होने पर रेलवे ने बढ़ाया पहियों का आयात
नरेश
- 01 Jul 2026, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित 'फोर्ज्ड व्हील प्लांट' (एफडब्ल्यूपी) में द्रवित पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति कम होने और मशीनरी में खराबी के कारण पहियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके उपरांत रेलवे मंत्रालय ने मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के लिए पहियों का आयात बढ़ा दिया है।
इस मुद्दे पर हाल ही में हुई दूसरी तिमाही बैठक में चर्चा की गई, जिसमें रेलवे बोर्ड और रेलवे की पहिया बनाने वाली तीन इकाइयों के अधिकारियों के अलावा सेल के दुर्गापुर इस्पात संयंत्र तथा 'मेटल एवं स्टील फैक्टरी', इशापुर सहित अन्य आपूत्तिकर्ता भी मौजूद थे।
पहिया बनाने वाली तीन इकाइयों में बेंगलुरु स्थित रेल व्हील फैक्टरी (आरडब्ल्यूएफ), बेला स्थित रेल व्हील प्लांट (आरडब्ल्यूपी), और रायबरेली स्थित एफडब्ल्यूपी शामिल हैं।
रेलवे मंत्रालय की ओर से बैठक को लेकर संबंधित अधिकारियों को भेजी गयी जानकारी में कहा गया है, ''एलपीजी आपूर्ति में कमी और जरूरी मशीनरी की खराबी के कारण रायबरेली के फोर्ज्ड व्हील प्लांट में पहियों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे एलएचबी पहियों का प्रोडक्शन कम हो गया है।''
इसमें कहा गया है, आपूर्ति में मौजूदा कमी को जहां तक संभव हो, आयात के जरिये पूरा किया जा रहा है। साथ ही, अगस्त से मेसर्स रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड के साथ लंबे समय पहले हुए आयात समझौते के तहत अतिरिक्त आपूर्ति की उम्मीद है।''
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए मंत्रालय के तय किए गए आवंटन के अनुसार, इन विनिर्माण इकाइयों से 51,685 पहिये और 22,000 पहियासेट बनाने की उम्मीद है।
हर सेट में दो पहिये और एक धुरी (एक्सल) होती है।
बैठक में यह बात सामने आई कि आरडब्ल्यूएफ, बेंगलुरु और आरडब्ल्यूपी, बेला ने पहली तिमाही में संतोषजनक प्रदर्शन किया और अपने आपूर्ति लक्ष्य पूरे किए।
अधिकारियों ने कहा, ''रायबरेली संयंत्र में एलपीजी की कमी और मशीनरी खराब होने की वजह से समस्या पैदा हुई तथा वह अपना उत्पादन लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया। इस वजह से आयात को बढ़ाना पड़ा है।''
उन्होंने आगे कहा, ''रेलवे का पहले से ही रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड के साथ पहिये की आपूर्ति को लेकर एक समझौता है। हालांकि, पहियों को लेकर पहले के समझौते के तहत, आपूर्ति अगस्त 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।''
भाषा सुरेश नरेश
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