क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी मामले में पांच दिन के भीतर 'अस्थायी' तौर पर राशि वापस करें बैंक: आरबीआई
योगेश
- 24 Jun 2026, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
मुंबई, 24 जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि क्रेडिट कार्ड के जरिये धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के बारे में ग्राहक से शिकायत मिलने की तारीख से पांच दिन के भीतर 'शैडो रिवर्सल' यानी विवादित रकम अस्थायी रूप से खाते में अंतरित कर देनी चाहिए।
आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की जवाबदेही को सीमित करने के लिए संशोधित नियम जारी कर यह व्यवस्था दी है।
बैंकों में 'शैडो रिवर्सल' का मतलब रकम की अस्थायी वापसी से है। इससे संबंधित ग्राहकों को तुरंत आर्थिक राहत मिलती है, हालांकि जांच पूरी होने तक आम तौर पर इन पैसों को निकाला नहीं जा सकता है।
संशोधित नियमों के अनुसार, बैंक को अपनी प्रणाली ऐसी बनानी चाहिए जिनसे ग्राहक इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (ईबीटी) करने में सुरक्षित महसूस करें। ग्राहकों द्वारा किए जाने वाले ईबीटी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रणाली और प्रक्रियाएं लागू करनी चाहिए।
आरबीआई ने कहा, ''बैंक को 500 रुपये से अधिक मूल्य के सभी ईबीटी के लिए अपने ग्राहकों को तुरंत एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा। 500 रुपये तक के मूल्य वाले ईबीटी के लिए, बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार तुरंत एसएमएस भेजने का फैसला कर सकता है, लेकिन ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।''
ये नियम एक जनवरी, 2027 से लागू होंगे।
साथ ही, संदेश भेजने और जवाब पाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक की संचार प्रणाली को संदेश की डिलिवरी और ग्राहक के जवाब (यदि कोई हो) मिलने की तारीख और समय रिकॉर्ड करना होगा।
आरबीआई ने कहा कि ग्राहक से किसी धोखाधड़ी वाले ईबीटी के बारे में शिकायत मिलने पर, बैंक को ग्राहक के खाते में आगे और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।
इसमें कहा गया, ''अगर बैंक की लापरवाही या कमी के कारण धोखाधड़ी वाला ईबीटी होता है, तो ग्राहक की जवाबदेही शून्य होगी और लेनदेन से जुड़ी पूरी राशि वापस की जाएगी। भले ही ग्राहक ने लेनदेन की रिपोर्ट की हो या नहीं।''
आरबीआई ने कहा कि तीसरे पक्ष की सेंधमारी के मामलों में, अगर ग्राहक अनधिकृत धोखाधड़ी वाले ईबीटी की रिपोर्ट घटना के पांच दिन के भीतर बैंक को करता है, तो उस पर कोई जवाबदेही नहीं होगी और पूरी राशि पाने का हकदार होगा।
पांच दिन के बाद बैंक को रिपोर्ट किए गए तीसरे पक्ष की सेंधमरी के मामलों में, ग्राहक की जवाबदेही बैंक की नीति के अनुसार तय की जाएगी।
केंद्रीय बैंक ने मार्च में मसौदा निर्देशों के जरिये अनधिकृत ईबीटी में ग्राहकों की जवाबदेही को सीमित करने के मौजूदा निर्देशों के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था।
इसमें धोखाधड़ी वाले ईबीटी की दूसरी श्रेणी को शामिल करने, धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन से जुड़ी शिकायतों के प्रसंस्करण में बैंकों को लगने वाले समय को कम करने और कम मूल्य वाले धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन के लिए क्षतिपूर्ति देने की प्रणाली शुरू करने का भी प्रस्ताव था।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि मसौदा निर्देशों पर मिली प्रतिक्रियाओं पर गौर किया गया और उसके आधार पर जरूरी बदलावों को अंतिम संशोधन निर्देशों में शामिल कर लिया गया है।
जिन मामलों में बैंक को धोखाधड़ी वाले ईबीटी को वापस करना होता है, वहां बैंक को यह पक्का करना होगा कि वापसी की तारीख वही हो जिस दिन लेनदेन हुआ था। ग्राहक को ब्याज का नुकसान न हो या उस पर ब्याज या अन्य शुल्क का कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।
कुछ पक्षों ने क्रेडिट कार्ड में धोखाधड़ी वाले ईबीटी के मामले में अस्थायी रूप से राशि की वापसी से जुड़ा प्रावधान शामिल करने का सुझाव दिया था, जिसे आरबीआई ने मान लिया।
आरबीआई ने कहा, ''क्रेडिट कार्ड में धोखाधड़ी वाले ईबीटी से जुड़ी शिकायत के मामले में, बैंक को ग्राहक से सूचना मिलने के पांच दिन के भीतर धोखाधड़ी वाले ईबीटी में शामिल रकम के बराबर अस्थायी तौर पर राशि वापस करनी होगी।''
केंद्रीय बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं।
आरबीआई ने कहा कि जिन मामलों में धोखाधड़ी वाला ईबीटी ग्राहक की लापरवाही के कारण होता है, वहां हुए नुकसान के लिए ग्राहक जिम्मेदार होगा, बशर्ते वह नुकसान क्षतिपूर्ति के लिए योग्य न हो।
इसमें यह भी कहा गया, ''ग्राहक द्वारा बैंक को धोखाधड़ी वाले ईबीटी की सूचना देने के बाद किसी भी अनधिकृत लेनदेन से होने वाले नुकसान को बैंक को उठाना होगा।''
कम मूल्य की धोखाधड़ी वाले ईबीटी के लिए क्षतिपूर्ति पर आरबीआई ने कहा कि धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के कारण 50,000 रुपये तक का बड़ा नुकसान होने पर शिकायत करने वाले वास्तविक पीड़ित को शुद्ध नुकसान की रकम का 85 प्रतिशत या 25,000 रुपये, जो भी कम हो, 'अपनी जिंदगी में एक बार' क्षतिपूर्ति के तौर पर दिया जाना चाहिए।
अगर ईबीटी से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में 29,412 रुपये से कम का नुकसान होता है और 85 प्रतिशत क्षतिपूर्ति दी जाती है, तो घरेलू धोखाधड़ी के मामले में रिजर्व बैंक को 65 प्रतिशत, ग्राहक के बैंक को 10 प्रतिशत और बाकी 10 प्रतिशत लाभार्थी बैंक को वहन करना चाहिए।
भाषा रमण अजय
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