महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: भाजपा नीत महायुति ने 17 में से 16 सीट जीतीं; विपक्ष का सूपड़ा साफ
पारुल
- 23 Jun 2026, 12:44 AM
- Updated: 12:44 AM
मुंबई, 22 जून (भाषा) सत्ताधारी और विपक्षी दोनों खेमों में हुई 'क्रॉस-वोटिंग' के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने सोमवार को स्थानीय निकाय क्षेत्रों से महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीट में से 16 पर जीत दर्ज की, जबकि नासिक सीट पर सत्ताधारी गठबंधन को चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा ने 11 सीट जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दल शिवसेना ने तीन सीट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने दो सीट अपने नाम कीं। भाजपा के बागी उम्मीदवार गोकुल गीते ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ते हुए नासिक सीट पर शिवसेना के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल हो गए।
द्विवार्षिक चुनाव मूल रूप से 17 सीट के लिए अधिसूचित किए गए थे, जिनमें एक उपचुनाव भी शामिल था, लेकिन केवल 11 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की आवश्यकता पड़ी, क्योंकि भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से मिलकर बने महायुति गठबंधन के उम्मीदवार छह सीट पर निर्विरोध चुने गए।
इन 11 निर्वाचन क्षेत्रों में 18 जून को मतदान हुआ था, जहां स्थानीय स्वशासी निकायों के निर्वाचित सदस्य मतदाता थे और मतगणना 22 जून को हुई।
कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) से मिलकर बना विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) एक भी सीट जीतने में नाकाम रहा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव परिणाम को महायुति की "प्रचंड जीत" और उसके पक्ष में निर्णायक जनादेश बताया।
फडणवीस ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में मिली है।
उन्होंने कहा, "भाजपा-महायुति ने महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव जीत लिया है। मैं सभी विजयी उम्मीदवारों को बधाई देता हूं।"
इन चुनावों में विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर क्रॉस-वोटिंग देखी गई, जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शप) के खेमों से भाजपा और शिवसेना के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया गया।
नागपुर में भाजपा उम्मीदवार राजीव पोतदार ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अतुल लोंढे अपनी पार्टी के वोट तक नहीं बचा पाए और खबरों के अनुसार कांग्रेस के करीब 40 वोट टूट गए।
नागपुर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले के विधानसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट खाली हो गई थी।
कांग्रेस नेता विकास ठाकरे ने नागपुर उपचुनाव के परिणाम पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "जो हुआ है, वह अच्छा नहीं है। वोट नहीं बंटने चाहिए थे। जिम्मेदार लोगों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या हुआ और जिन्होंने गद्दारी की है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।"
ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस क्रॉस-वोटिंग के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगी और पर्यवेक्षकों के साथ चर्चा करेगी।
सांगली-सतारा में भाजपा उम्मीदवार धैर्यशील कदम ने 593 वोट हासिल कर राकांपा (शप) के उम्मीदवार अभयसिंह जगताप को हराया, जिन्हें 292 वोट मिले। हालांकि, ऐसा कहा जा रहा है कि यहां 100 से अधिक सदस्यों ने क्रॉस-वोटिंग की, जो दोनों गठबंधनों के भीतर असंतोष का संकेत देता है।
नासिक का परिणाम सत्ताधारी गठबंधन के लिए एकमात्र झटके के रूप में सामने आया, जहां शिवसेना के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे (248 वोट) को निर्दलीय उम्मीदवार गीते (357) से 109 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कई निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इस निर्वाचन क्षेत्र में खुद चुनाव प्रचार किया था।
अपनी जीत के कुछ ही घंटों बाद गीते शिवसेना में शामिल हो गए।
राज्य विधानमंडल के उच्च सदन के लिए छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें शिवसेना के रवींद्र फाटक और दुष्यंत चतुर्वेदी, राकांपा के अनिकेत तटकरे और विक्रम काकड़े तथा भाजपा के अरुण लखानी और प्राजक्त तनपुरे शामिल हैं।
अन्य विजेताओं में भाजपा के सुहास सिरसाट (छत्रपति संभाजीनगर-जालना), अविनाश ब्रह्मणकर (भंडारा-गोंदिया), राजेंद्र राउत (सोलापुर), बसवराज पाटिल (धाराशिव-लातूर-बीड़), नंदकिशोर महाजन (जलगांव), प्रवीण पोटे (अमरावती) और अमर राजुरकर (नांदेड़) शामिल हैं, साथ ही शिवसेना के सईद खान (परभणी-हिंगोली) शामिल हैं।
विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि क्रॉस-वोटिंग ने निर्णायक भूमिका निभाई। नागपुर में कांग्रेस और सहयोगियों की संख्यात्मक ताकत के बावजूद, भाजपा ने 501 वोट हासिल किए, जो साफ तौर पर भीतरघात की ओर इशारा करता है।
इसी तरह का रुझान सांगली-सतारा और नासिक में भी देखने को मिला, जहां विपक्षी दलों को मिलने वाले वोट उम्मीद के मुताबिक नतीजों में नहीं बदल सके।
भाषा सुमित पारुल
पारुल
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