लद्दाख के नेताओं ने दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन में वांगचुक के हिस्सा लेने का बचाव किया
माधव
- 20 Jun 2026, 04:55 PM
- Updated: 04:55 PM
लेह, 20 जून (भाषा) 'लेह एपेक्स बॉडी' (एलएबी) और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (केडीए) ने दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भाग लेने का शनिवार को बचाव किया।
उन्होंने कहा कि वह अपनी निजी हैसियत से इसमें शामिल हुए थे और राष्ट्रीय मुद्दों से उनके जुड़ने से लद्दाख के आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
केंद्र के साथ बातचीत के कई दौर के बावजूद कोई ठोस नतीजा न निकलने का आरोप लगाते हुए इन दोनों संगठनों के नेताओं ने कहा कि वे समर्थन के लिए देश भर के राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित पक्षों से संपर्क करने पर विचार कर रहे हैं।
वांगचुक ने दिल्ली में छह जून को सीजेपी समर्थकों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और उनकी मांगों का समर्थन किया था। इन मांगों में परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग भी शामिल है।
एलएबी और केडीए ने शुक्रवार शाम को यहां अपने कोर ग्रुप की बैठक की। इस बैठक में एलएबी के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे, केडीए के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई, लद्दाख के सांसद हनीफ़ा जान और वांगचुक शामिल हुए।
दोरजे ने यहां पत्रकारों से कहा, ''वांगचुक दिल्ली के कार्यक्रम में 'एपेक्स बॉडी' के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल नहीं हुए थे। वह एक राष्ट्रीय हस्ती हैं। वह सिर्फ़ लद्दाख के नेता ही नहीं, बल्कि एक पर्यावरणविद् भी हैं, जिनके काम को पूरे देश में पहचान मिली है। वह वहां अपनी निजी हैसियत से गए थे।''
उन्होंने बताया कि वांगचुक को स्विट्जरलैंड जाना था, आज सुबह उनकी उड़ान थी और इसलिए वह प्रेस वार्ता में शामिल नहीं हो सके।
राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची जैसी अहम मांगों को लेकर पिछले पांच सालों में केंद्र के साथ बातचीत की धीमी गति का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केडीए और एपेक्स बॉडी, दोनों को लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर पूरे देश में दूसरे हितधारकों से बात करने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ''अगर भारत सरकार और गृह मंत्रालय का रवैया ऐसा ही रहा - यानी बैठकें और बातचीत तो होती रहें, लेकिन कोई ठोस नतीजा न निकले - तो हमें दूसरे रास्ते तलाशने होंगे।''
उन्होंने कहा कि जब ऐसी स्थिति सभी उचित सीमाओं को पार कर जाती है, तो लद्दाख के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए देश भर के अन्य हितधारकों - जिनमें विपक्षी दल और अन्य संगठन शामिल हैं - से संपर्क करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता।
भाषा
राजकुमार माधव
माधव
2006 1655 लेह