मेकेदातु परियोजना से कर्नाटक की तुलना में तमिलनाडु के किसानों को अधिक फायदा होगा: शिवकुमार
माधव
- 18 Jun 2026, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
(फोटो के साथ)
बेंगलुरु, 18 जून (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना का बचाव करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इससे कर्नाटक की तुलना में तमिलनाडु को अधिक फायदा होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि कर्नाटक सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार पड़ोसी राज्य को कावेरी का 177 टीएमसी पानी देने के लिए प्रतिबद्ध है।
शिवकुमार तमिलनाडु के राज्यपाल आर. वी. आर्लेकर द्वारा राज्य विधानसभा में दिए गए अभिभाषण के दौरान उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें राज्यपाल ने कावेरी नदी पर कर्नाटक द्वारा मेकेदातु बांध निर्माण के प्रयास को रोकने का आह्वान किया था।
शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि मेकेदातु प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बेंगलुरु के लिए पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करना और संकट के समय पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना है।
इससे पहले, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु संतुलन जलाशय की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अस्वीकार करने का अनुरोध किया था।
इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है। इसमें कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकपुरा में कावेरी नदी पर अर्कावती नदी के संगम के निकट एक बांध बनाने का प्रस्ताव शामिल है। इसमें 400 मेगावाट नवीकरणीय जलविद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए तैयार किया गया एक विद्युत संयंत्र भी शामिल है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा, ''मेकेदातु (परियोजना) केवल मेरे दिल के करीब नहीं है। यह पूरे दक्षिण भारत के दिल के करीब है। मेकेदातु एक ऐसी परियोजना है जो कर्नाटक की तुलना में तमिलनाडु को अधिक फायदा पहुंचाएगी।''
उन्होंने कहा, ''हम उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार 177 टीएमसी पानी छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें तमिलनाडु के किसानों की रक्षा करनी है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु की पेयजल आवश्यकताओं को छोड़कर सिंचाई के लिए 'एक बाल्टी पानी भी' इस्तेमाल नहीं किया जायेगा।
शिवकुमार ने कहा कि यह परियोजना तमिलनाडु के कावेरी जल के हिस्से को प्रभावित नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पिछले 40 से 50 वर्षों से तमिलनाडु की पूरी राजनीति कावेरी के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।
उन्होंने कहा, ''देखिए, तमिलनाडु की पूरी राजनीतिक व्यवस्था के लिए यह (कावेरी जल बंटवारा विवाद) पिछले 40–50 वर्षों से एक राजनीतिक एजेंडा रहा है। मैं उनकी राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता।''
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मेकेदातु परियोजना मामला अदालत के समक्ष है, जिसने पहले ही निर्देश जारी कर दिए हैं।
शिवकुमार ने कहा कि इस फैसले से दोनों राज्यों को फायदा हुआ है। उन्होंने कहा, ''किसी भी कीमत पर हमें उन्हें 177 टीएमसी पानी छोड़ना हमारा अनिवार्य कर्तव्य है। पिछले वर्ष 400 टीएमसी से अधिक पानी समुद्र में बह गया। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?''
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक ने अपने क्षेत्र में तमिलनाडु द्वारा बनाए गए बांधों का विरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना बेंगलुरु की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ जलविद्युत ऊर्जा भी उत्पन्न करेगी।
शिवकुमार ने कहा, ''हम किसी प्रकार की वित्तीय सहायता या ऐसी कोई चीज नहीं मांग रहे हैं। केवल बिजली क्षेत्र को इससे लाभ होगा। हम 400 मेगावाट बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। यह कर्नाटक के लिए मुख्य फायदा है। पेयजल के अलावा, यह एक ऐसी परियोजना है जो पहले तमिलनाडु को और फिर कर्नाटक को फायदा पहुंचाती है।''
उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर किसी भी समय तमिलनाडु के साथ चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना दोनों राज्यों के हित में है।
शिवकुमार ने कहा, ''बिल्कुल, मैं उनसे किसी भी समय बैठकर बात करने के लिए तैयार हूं। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। चाहे तमिलनाडु हो या कर्नाटक, हम सभी भारतीय हैं। हम सभी एक ही नदी और एक ही पानी पर निर्भर हैं। कावेरी का पानी कृषि, पेयजल, पशुओं, पक्षियों, उद्योगों और सभी के लिए आवश्यक है।''
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव
1806 1807 बेंगलुरु