इंदौर में लोगों का दूषित पेयजल से बीमार होने का दावा,स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को 'सामान्य' बताया
संतोष
- 17 Jun 2026, 03:33 PM
- Updated: 03:33 PM
इंदौर (मध्यप्रदेश), 17 जून (भाषा) इंदौर के महावीर नगर में दूषित पेयजल से कई लोगों के बीमार होने के दावों के अगले दिन स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को कहा कि इस क्षेत्र में फिलहाल स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है।
विभाग ने दावा किया कि महावीर नगर के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में उल्टी-दस्त से पीड़ित कोई भी मरीज भर्ती नहीं है।
यह मामला देश के सबसे स्वच्छ शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से कई लोगों की मौत के घटनाक्रम के करीब छह महीने बाद सामने आया है।
जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी सरकारी विज्ञप्ति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी के हवाले से कहा गया,''महावीर नगर क्षेत्र में मंगलवार को कुछ लोगों में उल्टी-दस्त के लक्षणों की सूचना प्राप्त होते ही स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) को मौके पर भेजा। आरआरटी ने क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया और लगभग 85 घरों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया।''
हासानी के मुताबिक, सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि इस क्षेत्र के किसी भी शासकीय अथवा निजी चिकित्सालय में उल्टी-दस्त से पीड़ित कोई भी मरीज भर्ती नहीं है।
उन्होंने कहा,''स्थानीय स्तर पर 15 से 20 लोगों में उल्टी-दस्त जैसे लक्षण होने संबंधी जानकारी प्राप्त हुई जिनके रक्त के नमूने लिए गए। हालांकि, जांच के लिए आवश्यक मल (स्टूल) के नमूने इनमें से किसी भी व्यक्ति द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए।''
सीएमएचओ ने कहा कि फिलहाल महावीर नगर में स्थिति 'सामान्य और नियंत्रण में' है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस क्षेत्र में ओआरएस के पैकेट और क्लोरीन की गोलियों का 'एहतियातन' वितरण किया है।
महावीर नगर में एक सरकारी नलकूप में कथित तौर पर सीवेज के पानी के रिसाव से पेयजल दूषित होने की शिकायत के बाद मंगलवार को कई लोगों ने उल्टी, दस्त और पेट संबंधी समस्याएं होने का दावा किया था।
इसके बाद नगर निगम ने संबंधित नलकूप का उपयोग बंद करा दिया था और क्षेत्र में टैंकर के जरिये जलापूर्ति शुरू की थी।
इससे पहले, शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से कई लोगों की मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की मौत हुई।
हालांकि, इस मामले पर विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को चर्चा के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई।
भागीरथपुरा में पेयजल त्रासदी की न्यायिक जांच मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग कर रहा है। भाषा हर्ष संतोष
संतोष
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