भारत की विकास गाथा के सबसे रोमांचक अध्यायों में से एक है पूर्वोत्तर: नायडू
अमित
- 17 Jun 2026, 10:55 AM
- Updated: 10:55 AM
(कुणाल दत्त)
शिलांग, 17 जून (भाषा) केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि मेघालय को दशकों तक ''बादलों के घर'' के रूप में जाना जाता था लेकिन आज यह ''अवसरों के घर'' के रूप में उभर रहा है और यह बदलाव ''असीम संभावनाओं'' वाले पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की व्यापक कहानी को दर्शाता है।
नायडू ने एक वीडियो संदेश में यह बात कही जिसे सोमवार और मंगलवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में आयोजित पूर्वोत्तर भारत अवसंरचना शिखर सम्मेलन के एक सत्र में मंगलवार को दिखाया गया।
मंत्री ने कहा कि उन्हें किसी कार्यक्रम के लिए जब भी पूर्वोत्तर जाने का ''सौभाग्य'' मिला, वह वहां के लोगों और क्षेत्र में मौजूद ''असीम संभावनाओं'' से अत्यंत प्रेरित होकर लौटे।
नायडू ने कहा कि मेघालय को दशकों तक ''बादलों के घर के रूप में जाना जाता था लेकिन आज यह अवसरों के घर के रूप में उभर रहा है। यह बदलाव पूरे पूर्वोत्तर की व्यापक कहानी को दर्शाता है।''
नागर विमानन मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर को आजादी के बाद कई वर्षों तक अक्सर ''दिल्ली से उसकी दूरी'' के आधार पर देखा जाता था लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व तथा उनकी 'एक्ट ईस्ट' नीति और ''तेजी से एवं पहले कदम उठाने के दृष्टिकोण'' के कारण पूर्वोत्तर की पहचान दूरी से नहीं, बल्कि संपर्क से हो रही है।
नायडू ने कहा कि स्वयं यह शिखर सम्मेलन इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों, केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की मौजूदगी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए समूची सरकार के स्तर पर अपनाए गए समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाती है।
'पूर्व का स्कॉटलैंड' कहे जाने वाले शिलांग में अपनी तरह के इस पहले कार्यक्रम में पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों की सरकारों और उद्योग जगत समेत कई क्षेत्रों के सैकड़ों प्रतिनिधि शामिल हुए। यह कार्यक्रम 'लारिति परफॉर्मिंग सेंटर' में आयोजित किया गया।
नायडू ने पहले से रिकॉर्ड किए गए अपने संबोधन में कहा कि भारत जब विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, ''तो मुझे विश्वास है कि पूर्वोत्तर पूरे देश के सबसे बेहतर संपर्क सुविधा वाले, गतिशील और अवसरों से भरपूर क्षेत्रों में से एक बनकर उभरेगा।''
उन्होंने कहा कि ''पहले की मानसिकता में पूर्वोत्तर को अंतिम अध्याय माना जाता था'' लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी के ''सुधार, प्रदर्शन और बदलाव'' के दृष्टिकोण के तहत यह ''भारत की विकास गाथा के सबसे रोमांचक और सबसे तेजी से आगे बढ़ते अध्यायों में से एक'' बन गया है।
उन्होंने कहा कि इसके परिणाम ''स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं'' और उन्होंने अपनी बात के समर्थन में सड़क एवं हवाई संपर्क से जुड़े कुछ आंकड़े साझा किए।
नायडू ने कहा, ''मैंने नागर विमानन मंत्री के रूप में स्वयं देखा है कि हवाई संपर्क ने इस क्षेत्र को किस प्रकार बदल दिया है। क्षेत्र में 2014 में केवल नौ हवाई अड्डे संचालित थे लेकिन आज इनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है। अब पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक हवाई अड्डा संचालित है।''
मंत्री ने कहा कि केवल 'उड़े देश का आम नागरिक' (उड़ान) योजना के तहत पूर्वोत्तर में करीब 90 क्षेत्रीय हवाई मार्गों पर परिचालन शुरू किया गया है लेकिन यह केवल शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि हाल में स्वीकृत संशोधित उड़ान योजना के तहत देशभर में 200 'हेलीपोर्ट' विकसित कर संपर्क व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और इसके तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रत्येक जिले में कम से कम एक हेलीपोर्ट विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
मंत्री ने कहा, ''पिछले 12 वर्ष में अकेले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में विमानन अवसंरचना पर करीब 2,400 करोड़ रुपये का निवेश किया है और 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं पहले से प्रस्तावित हैं। इनमें सिलचर में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का विकास, जोरहाट में नए नागरिक विमानन परिसर का निर्माण और एयरबस ए320 विमानों के संचालन के लिए शिलांग हवाई अड्डे का उन्नयन शामिल है।''
उन्होंने सभी हितधारकों से कहा कि अब समय आ गया है कि ''हम मिलकर विमर्श को बदलें और यह पूछने के बजाय कि ''पूर्वोत्तर ही क्यों'', पूरे विश्वास के साथ यह पूछें कि ''पूर्वोत्तर क्यों नहीं।''
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