दिल्ली में महामारी के वर्षों में दहेज संबंधी मौत के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई
जोहेब
- 13 Jun 2026, 10:25 PM
- Updated: 10:25 PM
(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन और सामाजिक अलगाव की स्थिति ने महिलाओं के लिए चुनौतियों को और बढ़ा दिया था और दिल्ली में 2021 में दहेज संबंधी मौत के 141 मामले दर्ज किए गए थे, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं।
'पीटीआई' के पास उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में राष्ट्रीय राजधानी में दहेज संबंधी मौत के 141 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या 2022 में घटकर 131, 2023 में 115, 2024 में 109 और 2025 में 99 रह गई। इस वर्ष 15 मई तक ऐसे 28 मामले दर्ज किए गए हैं।
ये आंकड़े इन मामलों से जुड़े गिरफ्तारियों में भी एक समान रुझान दर्शाते हैं। पुलिस ने 2021 में दहेज संबंधी मौत के मामलों में 210 लोगों को गिरफ्तार किया।
यह संख्या 2022 में 198, 2023 में 183, 2024 में 181 और 2025 में 163 रही। इस वर्ष 15 मई तक 28 मामलों में 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
दहेज संबंधी मौत के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे कमी आने के बावजूद यह समस्या अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच आरोपों की प्रकृति और पीड़ित परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ की जाती है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा की गई क्रूरता से संबंधित आंकड़े शहर में महिलाओं की घरेलू परेशानियों की एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी में 2021 में ऐसे 4,731 मामले दर्ज किए गए, जो 2022 में बढ़कर 4,901 हो गए, लेकिन 2023 में घटकर 4,236 रह गए। इसके बाद 2024 में यह संख्या फिर बढ़कर 4,647 हो गई और 2025 में 4,426 रही। इस वर्ष 15 मई तक 1,688 मामले दर्ज किए गए थे।
आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि ऐसे मामलों में आरोप-पत्र दाखिल करने की संख्या में वृद्धि हुई है।
आंकड़ों के अनुसार जहां 2021 में पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामलों में 825 आरोप-पत्र दाखिल किए गए थे, वहीं यह संख्या बीते वर्षों में लगातार बढ़ती गई और 2025 में बढ़कर 1,645 हो गई। इस वर्ष 15 मई तक 563 आरोप-पत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके थे, जो घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में अभियोजन को मजबूत करने के लिए जांचकर्ताओं के लगातार प्रयासों को दर्शाता है।
दहेज निषेध अधिनियम के तहत दर्ज मामले वर्षों से अपेक्षाकृत कम लेकिन लगातार बने हुए हैं। दिल्ली में 2021 में 16 मामले, 2022 में 13 मामले दर्ज किए गए और 2023, 2024 तथा 2025 में प्रत्येक वर्ष 16-16 मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष अब तक ऐसे नौ मामले दर्ज किए गए हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ''महामारी के दौरान आर्थिक कठिनाइयों, नौकरी जाने और लंबे समय तक घरों में बंद रहने की स्थिति के कारण घरेलू तनाव बढ़ गया, जिससे महिलाएं के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का खतरा बढ़ गया।''
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे अपराधों से निपटने और महिलाओं की सुरक्षा एवं गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक समर्थन बहुत आवश्यक हैं।
भाषा
देवेंद्र जोहेब
जोहेब
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