केंद्र सरकार ने दिल्ली में जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा लिया
माधव
- 13 Jun 2026, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) केंद्र सरकार के बेदखली नोटिस के खिलाफ अदालतों से भारतीय पोलो संघ (आईपीए) को राहत नहीं मिल पाने के बाद, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के अधिकारियों ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के रेस कोर्स क्षेत्र स्थित 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा ले लिया।
इस प्रतिष्ठित परिसर का प्रबंधन करने वाली आईपीए ने इस बेदखली कार्रवाई को ''गलत, मनमाना और कानून के विपरीत'' बताते हुए कहा कि वह अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का सहारा लेगी।
यह कार्रवाई 20 मई को जारी किए गए बेदखली आदेश के बाद की गई है, जिसके तहत एलएंडडीओ ने इस भूमि पर कब्जा मांगा था। कार्यालय ने इसके लिए तर्क दिया था कि यह भूमि ''वृहद सार्वजनिक उद्देश्य और जनहित'' के लिए आवश्यक है।
हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि इस भूमि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा।
शनिवार को केंद्र सरकार के अधिकारियों ने ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड की बाहरी दीवार पर एक नोटिस चस्पा किया, जिसमें लिखा था, ''यह भूमि भारत सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) की संपत्ति है।''
नोटिस में कहा गया, ''इस भूमि पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा, अतिक्रमण, निर्माण कार्य या अन्य कोई अवैध गतिविधि कानून के तहत दंडनीय अपराध है।''
इसमें चेतावनी दी गई कि ''ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानूनों के अनुसार दंडात्मक और कार्रवाई की जाएगी।''
यह विवाद लुटियंस दिल्ली स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने अदालतों को बताया है कि जयपुर पोलो ग्राउंड और दिल्ली जिमखाना क्लब सहित उसके आसपास स्थित प्रतिष्ठानों के कब्जे वाली भूमि को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अपने अधीन लेने का प्रस्ताव है।
आठ जून को दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) की बेदखली नोटिस पर रोक लगाने के अनुरोध वाली याचिका पर निर्णय लेने के लिए एक जिला अदालत को निर्देश दिया था। हालांकि, जिला अदालत ने इस आदेश के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
शुक्रवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने भी आईपीए को राहत देने से इनकार कर दिया। आईपीए ने सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 की धारा 9(3) के तहत आवेदन दायर कर केंद्र सरकार के बेदखली आदेश के क्रियान्वयन और अमल पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।
शनिवार को ऑनलाइन जारी अपने आदेश में अदालत ने कहा, ''इसी प्रकार का अनुरोध प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटियाला हाउस अदालत तथा दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष भी किया गया था, लेकिन अपीलकर्ता को कोई राहत नहीं मिली। इसलिए न्यायिक अनुशासन और औचित्य को ध्यान में रखते हुए मैं अगली सुनवाई तक भी विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हूं।''
हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार को अपील और स्थगन आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया तथा मामले की अगली सुनवाई 17 जून को अवकाशकालीन न्यायाधीश के समक्ष निर्धारित कर दी।
आईपीए के वकील मेजर (सेवानिवृत्त) निर्विकार सिंह ने कहा, ''चूंकि मामला न्यायालय के विचाराधीन है और इसकी सुनवाई जारी है, इसलिए एसोसिएशन इस समय इस पर कोई और टिप्पणी नहीं करना चाहती।''
महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय ने करीब 1930 में यह मैदान दिल्ली पोलो क्लब को उपहारस्वरूप प्रदान किया था। इसके बाद यह राष्ट्रीय राजधानी में पोलो खेल के सबसे प्रमुख केंद्रों में से एक बन गया।
निर्विकार सिंह ने कहा, ''सवाई मान सिंह द्वितीय को व्यापक रूप से अपने दौर के महानतम पोलो खिलाड़ियों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में जयपुर पोलो टीम ने 20वीं सदी के शुरुआती और मध्य दशकों में इस खेल पर लंबे समय तक दबदबा बनाए रखा था।''
वर्ष 1983 में पोलो खेल की राष्ट्रीय शासी संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त आईपीए ने इस परिसर का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया।
आईपीए ने 30 नवंबर 1992 के एक पत्राचार का हवाला देते हुए दावा किया है कि उसमें पट्टे के नवीनीकरण के निर्णय की पुनर्पुष्टि की गई थी और यह भी कहा गया था कि एक अप्रैल 1993 से मैदान को किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किए जाने तक लीज का विस्तार हर वर्ष किया जाएगा।
संघ का यह भी कहना है कि उसने अप्रैल 2025 में 31 मार्च 2030 तक की अवधि के लिए 30,400 रुपये का भू-किराया जमा कराया था और यह भुगतान सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार भी किया गया।
हालांकि, केंद्र सरकार का रुख इससे अलग है। उसका कहना है कि इस भूमि पट्टा मार्च 1993 में ही समाप्त हो गयी थी और उसके बाद से संघ बिना किसी वैध अधिकार के इस जमीन पर कब्जा किए हुए है।
भाषा खारी माधव
माधव
1306 2024 नयी दिल्ली