त्रिपुरा: उग्रवादी संगठनों ने मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद रेल-सड़क रोकों आंदोलन वापस लिया
माधव
- 12 Jun 2026, 10:12 PM
- Updated: 10:12 PM
(तस्वीरों के साथ)
अगरतला, 12 जून (भाषा) पश्चिमी त्रिपुरा जिले में दो उग्रवादी संगठनों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा घोषित 250 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज को लागू करने की मांग को लेकर आठ घंटे तक प्रमुख रेल और सड़क मार्गों को बाधित किया।
इन दोनों संगठनों ने दो साल पहले शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) के आह्वान पर 72 घंटे के बंद की शुरुआत सुबह छह बजे हुई, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही और रेल सेवाएं प्रभावित हुईं।
एक उग्रवादी नेता ने बताया कि हालांकि मुख्यमंत्री माणिक साहा के हस्तक्षेप के बाद अपराह्न करीब दो बजे विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया गया।
जनजाति कल्याण मंत्री विकास देबबर्मा, पुलिस महानिरीक्षक (खुफिया)कृष्णेंदु चक्रवर्ती और पश्चिमी त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक के साथ नाकेबंदी वाली जगहों में से एक 'हताई कतार' गए और मुख्यमंत्री की ओर से विरोध प्रदर्शन वापस लेने का संदेश प्रदर्शनकारियों को दिया।
एनएलएफटी नेता परिमल देबबर्मा ने संवाददाताओं को बताया, ''हमने दिल्ली में मौजूद मुख्यमंत्री के अनुरोध पर नाकेबंदी खत्म कर दी। मुख्यमंत्री की ओर से आदिवासी कल्याण मंत्री ने हमें भरोसा दिलाया कि हमारी समस्याओं पर चर्चा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक होगी।''
उन्होंने दावा किया कि बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे, जबकि मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और जनजातीय कल्याण मंत्री के भी चर्चा में शामिल होने की उम्मीद है।
खबर लिखे जाने तक इस घटनाक्रम पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था।
देबबर्मा ने कहा, ''कल मंत्री के साथ हमारी बैठक हुई, जिसमें कुछ सकारात्मक नतीजे निकले। लेकिन दो अहम मांगें पूरी नहीं हुईं, जिसकी वजह से हमें रेल-सड़क जाम प्रदर्शन करना पड़ा।''
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के लिए पुनर्वास पैकेज को लागू करने के लिए एक एजेंसी को जिम्मेदारी दी है, जो ''शांति समझौते की मुख्य भावना का उल्लंघन कर रही है''।
पूर्वोत्तर राज्य में 1990 के दशक में बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई थी। मुख्य उग्रवादी समूहों में एनएलएफटी और एटीटीएफ शामिल थे, जो एक आदिवासी राज्य बनाना चाहते थे। बाद में, केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया।
सितंबर 2024 में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, त्रिपुरा सरकार और दो संगठनों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्र सरकार ने त्रिपुरा की आदिवासी आबादी के सर्वांगीण विकास के लिए 250 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी है।
भाषा धीरज माधव
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