देश का खाद्य तेल आयात मई में 6.7 प्रतिशत बढ़कर 13.39 लाख टन
रमण
- 12 Jun 2026, 06:26 PM
- Updated: 06:26 PM
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) देश का खाद्य तेल आयात मई में 6.7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 13.39 लाख टन रहा। कच्चे सोयाबीन तेल की अधिक मांग इसकी मुख्य वजह रही।
उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वनस्पति तेल का आयात मई में बढ़कर 13,38,936 टन हो गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 12,54,883 टन था। वनस्पति तेल में खाद्य एवं गैर-खाद्य दोनों तेल शामिल हैं।
यह वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे सोयाबीन तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण हुई, जो इस अवधि में 3,98,585 टन से बढ़कर 4,93,854 टन हो गया।
गैर-खाद्य तेलों का आयात भी दोगुने से अधिक होकर पिछले महीने 26,202 टन हो गया, जो मई 2025 में 12,040 टन था।
इससे मई 2026 में भारत का कुल वनस्पति तेल आयात (खाद्य और गैर-खाद्य) 8 प्रतिशत बढ़कर 13.65 लाख टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 12.67 लाख टन था।
तेल वर्ष 2025-26 के पहले सात महीनों में कुल वनस्पति तेल आयात 12 प्रतिशत बढ़कर 93.65 लाख टन हो गया, जो 2024-25 की इसी अवधि में 83.39 लाख टन था।
एसईए ने बताया कि नवंबर 2025 से मई 2026 (तेल वर्ष के पहले सात महीनों) में खाद्य तेल आयात 13 प्रतिशत बढ़कर 92.17 लाख टन रहा, जबकि गैर-खाद्य तेल आयात घटकर 1,47,710 टन रहा।
संस्था के अनुसार मई में आयात बढ़ने का प्रमुख कारण सोयाबीन तेल का दाम पाम ऑयल के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी होना है।
सरकार ने एक जून से कच्चे पाम तेल पर शुल्क मूल्य बढ़ाकर 1,218 डॉलर प्रति टन और रिफाइंड पाम ऑयल (आरबीडी) पर 1,222 डॉलर प्रति टन कर दिया। वहीं कच्चे सोयाबीन तेल पर शुल्क मूल्य थोड़ा कम किया गया है।
एसईए ने कहा कि मई 2026 में रिफाइंड पामोलीन का कोई आयात नहीं हुआ, जबकि नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच इसका आयात घटकर 47,270 टन रह गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 8,26,800 टन था।
संस्था ने कहा कि सरकार की नीति ने कच्चे और रिफाइंड तेल के बीच शुल्क अंतर बनाए रखा है। इससे घरेलू रिफाइनिंग को बढ़ावा मिला है और रोजगार सृजन में मदद मिली है।
एसईए ने बताया कि इस अवधि में रिफाइंड तेल का हिस्सा घटकर तीन प्रतिशत रह गया, जबकि कच्चे तेल का हिस्सा बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया।
साथ ही नेपाल से रिफाइंड तेल का आयात भी जारी है, जो साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र) समझौते के तहत शून्य आयात शुल्क का लाभ लेता है।
भाषा निहारिका रमण
रमण
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