प्रधानमंत्री की सलाहकार समिति के कार्यपत्र में लोकसभा में सीट वृद्धि के लिए 'लक्षित परिसीमन' की बात
माधव
- 11 Jun 2026, 10:04 PM
- Updated: 10:04 PM
नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक कार्यपत्र में ''लक्षित परिसीमन'' मॉडल का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत 170 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों को छोटी इकाइयों में बांटा जाएगा ताकि निचले सदन की सदस्य संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 824 किया जा सके और चुनावी भागीदारी को बेहतर बनाया जा सके।
'निर्वाचन क्षेत्र आकार, संघटक और भारत की लोकसभा (2009-2024) में परिसीमन के लिए मामला' शीर्षक वाले पत्र में कहा गया है कि भविष्य में होने वाले परिसीमन के काम में केवल सीटों के समान बंटवारे पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहाँ पुनर्गठन प्रतिनिधित्व और मतदाताओं की पहुँच पर सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा।
ईएसी-पीएम की सदस्य डॉ. शमिका रवि और भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (दिल्ली केंद्र) की अर्थशास्त्र एवं योजना इकाई के मुदित कपूर द्वारा लिखे गए इस कार्यपत्र में कहा गया है, ''लक्षित योजना के तहत 543 में से 170 चुनाव क्षेत्रों को कुल 824 क्षेत्रों में बांटा जाएगा (59 को दो हिस्सों में और 111 को तीन हिस्सों में)।''
इसे ईएसी-पीएम की वेबसाइट पर ऐसे समय में अपलोड किया गया है जब सरकार ने संकेत दिया है कि वह संसद में तीन विधेयक फिर से पेश करने की योजना बना रही है। इन विधेयकों का मकसद देश भर में परिसीमन करना, लोकसभा की मंजूर सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करना और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित करना है।
अप्रैल में संसद के एक विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में संबंधित विधेयक (जिनमें संविधान संशोधन का प्रस्ताव करने वाला एक विधेयक भी शामिल था) पारित नहीं हो पाए थे, क्योंकि एकजुट विपक्ष के विरोध के कारण सरकार ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाई।
ईएसी-पीएम का पेपर 59 चुनाव क्षेत्रों को दो हिस्सों में और 111 चुनाव क्षेत्रों को तीन हिस्सों में बांटकर कुल 824 चुनाव क्षेत्र बनाने का सुझाव देता है। प्रस्तावित मॉडल के तहत, 59 प्रस्तावित दो-तरफ़ा विभाजन में से 22 अकेले केरल और तमिलनाडु में होंगे।
तीन-तरफ़ा विभाजन की स्थिति में, सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश (17), महाराष्ट्र (12), बिहार (10) और पश्चिम बंगाल (10) को मिलेगा। इस फ़ॉर्मूले को लागू करने से लोकसभा में दक्षिणी राज्यों और ज़्यादा आबादी वाले उत्तरी व पश्चिमी राज्यों की सीटों का हिस्सा मोटे तौर पर वैसा ही रहेगा: क्रमशः 23.6 प्रतिशत के मुक़ाबले 23.7 प्रतिशत, और 45.2 प्रतिशत के मुक़ाबले 45.6 प्रतिशत।
इस फॉर्मूले से संबंधित सारिणी के अनुसार, सीटों की संख्या इस तरह बढ़ेगी: तेलंगाना में 17 से 26, आंध्र प्रदेश में 25 से 38, कर्नाटक में 28 से 42, तमिलनाडु में 39 से 59 और केरल में 20 से 30।
वहीं, महाराष्ट्र में यह संख्या 48 से बढ़कर 72, राजस्थान में 25 से 38, उत्तर प्रदेश में 80 से 120, मध्यप्रदेश में 29 से 44, गुजरात में 26 से 39 और बिहार में 40 से बढ़र 60 हो जाएगी।
भाषा नेत्रपाल माधव
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