आखिरी बातचीत में सुरेश ने शुभरात्रि, बच्चों का ख्याल रखना कहा था : पत्नी
माधव
- 11 Jun 2026, 08:37 PM
- Updated: 08:37 PM
विशाखापत्तनम(आंध्र प्रदेश), 11 जून (भाषा)अमेरिका द्वारा ओमान तट के नजदीक एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाकर किये गए हमले में मारे गए आंध्र प्रदेश के निवासी एवं मरीन इंजीनियर सुरेश पटनाला (44) ने परिवार को किये गए आखिरी फोन कॉल पर 'शुभरात्रि- बच्चों का ख्याल रखना' कहा था। यह जानकारी बृहस्पतिवार को उनकी पत्नी भार्गवी ने 'पीटीआई-भाषा' को दी।
पटनाला के अलावा दो अन्य भारतीय नाविकों की भी इस हमले में मौत हुई है।
भार्गवी ने बताया कि उनके दिन की शुरुआत पति के 'सुप्रभात' संदेश के साथ होती थी, लेकिन अब उनके मैसेज बॉक्स में ऐसा कोई संदेश नहीं आ रहा।
उन्होंने बताया कि सुरेश इस महीने के आखिर में अपनी शादी की 15वीं सालगिरह परिवार के साथ मनाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन सब खत्म हो गया।
परेशान भार्गवी ने 'पीटीआई-भाषा'को बताया, '' हमले से एक रात पहले मुझे भेजे गए अपने आखिरी मैसेज में उन्होंने कहा था, ''शुभरात्रि। बच्चों का ख्याल रखना।''
उन्होंने कहा, ''सुरेश रोज परिवार के सदस्यों को सुप्रभात का संदेश भेजते थे। हमले वाली सुबह मैं उनके मैसेज का इंतज़ार करती रही, यह सोचकर कि शायद वे व्यस्त होंगे, क्योंकि आम तौर पर उस समय वह डेक पर नहीं होते थे।''
भार्गवी ने परिवार पर इस त्रासदी के असर को इंगित करते हुए 'पीटीआई-भाषा'से कहा, ''हम चार थे, लेकिन अब हम तीन रह गए हैं।''
उन्होंने बताया कि दोनों बेटे (उम्र कमश: 13 साल और 10 साल) पिता की मौत खबर सुनकर बेहद दुखी हैं और उन्हें शांत कराना मुश्किल हो रहा है।
अमेरिकी सेना के मध्य कमान ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि जहाज ने ईरान से तेल ले जाने की कोशिश करके ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की जारी नाकेबंदी का उल्लंघन किया था।
भार्गवी ने कहा कि सुरेश निजता को पसंद करने वाले व्यक्ति थे और कभी प्रचार या सोशल मीडिया की चर्चा में नहीं आना चाहते थे। उन्होंने कहा कि अब उनकी एकमात्र प्राथमिकता सुरेश से मिलना और उन्हें (उनके पार्थिव शरीर को) घर लाना है।
सुरेश के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे, माता-पिता और एक बहन हैं। उनके पास समुद्री उद्योग में लगभग दो दशकों का अनुभव था। घटना के समय वह मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत थे और विगत करीब 12 साल से उक्त कंपनी में काम कर रहे थे।
परिवार के अनुसार, सुरेश को जहाज से कार्यमुक्त होने का पत्र मिल चुका था और समुद्र में लगभग पांच महीने बिताने के बाद घर लौटने से पहले वह अपनी जगह लेने वाले व्यक्ति का इंतज़ार कर रहे थे।
भार्गवी ने कहा कि सुरेश का मरीन इंजीनियर होना केवल एक पेशा नहीं था, बल्कि उनका जुनून था।
परिवार को दी गई जानकारी के मुताबिक जहाज के जनरेटर में कोई खराबी आई थी और सुरेश उसे देखने गए थे, तभी यह हादसा हुआ। उन्हें बताया गया कि सुरेश सीधे इसकी चपेट में आ गए और उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला।
परिवार ने घटना के बारे में आधिकारिक जानकारी हासिल करने, शव को वापस लाने और उसे स्वदेश भेजने की प्रक्रिया में सहायता मांगी है।
परिवार बेसब्री से सुरेश के घर आने का इंतज़ार कर रहा था और उसे उम्मीद थी कि वह 24 जून को अपनी शादी की सालगिरह से पहले वापस आ जाएंगे।
भार्गवी को किया कि हाल ही में उनकी बातचीत उसके घर लौटने के सफर के बारे में हुई थी।
भार्गवी ने बताया कि सुरेश ने मजाक में कहा था कि हवाई अड्डा अब और दूर हो गया है, इसलिए जब वह वापस आएंगे तो उन्हें लेने के लिए उसे बहुत पहले घर से निकलना होगा।
आंध्र भवन के आयुक्त अर्जा श्रीकांत ने पुष्टि की कि वाणिज्यिक जहाज पर सवार जिन तीन चालक सदस्यों की की मौत हुई, उनमें चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला भी शामिल थे।
उन्होंने ओमान में भारत के राजदूत गोदावर्ति वेंकट श्रीनिवास को पत्र लिखकर सुरेश के मामले में तत्काल मदद मांगी है।
श्रीकांत ने अपने पत्र में मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से अनुरोध किया कि वे संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाएं, जरूरी कागजी कार्रवाई और पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की औपचारिकताओं में तेजी लाएं, और शोक-संतप्त परिवार को हर संभव मदद देने के साथ-साथ उन्हें मामले की प्रगति के बारे में जानकारी देते रहें।
भार्गवी ने बताया कि सुरेश वास्तव में उस जहाज पर केवल 10 दिन के लिए एक अन्य मुख्य अभियंता की मदद करने गए थे।
उन्होंने बताया लेकिन जहाज पर पहुंचने पर दूसरे अभियंता को कार्यमुक्त कर दिया गया और सुरेश को उनके व्यापक अनुभव और अलग-अलग तरह के जहाज़ चलाने की क्षमता के तैनात रखा गया।
भार्गवी ने कहा कि वह बहुत कम सामान ले गए थे और केवल कुछ ही कपड़े साथ रखे थे, क्योंकि ऐसा कोई संकेत नहीं था कि उनकी तैनाती की अवधि बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि सुरेश के काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद, चीनी नव वर्ष के कारण कामकाज में देरी हुई और सामान उतारने का काम शुरू होने से पहले चालक दल को लगभग 20 दिनों तक लंगर डालकर रुकना पड़ा। उन्होंने बताया कि इसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया, जिससे उनका वहां रुकना और लंबा खिंच गया।
भार्गवी ने कहा कि 48,000 टन का यह जहाज़ सामान ढोने का काम करता था और उस पर सामान चढ़ाने के लिए छोटे जहाज़ों पर निर्भर रहता था।
उन्होंने कहा कि हमले से पहले वह जहाज़ लगभग एक हफ़्ते से उस जगह पर था और उस पर पहले ही लगभग 28,000 टन सामान लादा जा चुका था।
भार्गवी ने बताया कि इलाके में संचार प्रणालियों पर पाबंदियों और जैमर की वजह से ऑडियो और वीडियो कॉल नहीं हो पा रहे थे, जिसकी वजह से उनकी बातचीत 'टेक्स्ट मैसेज'से होती थी।
भाषा धीरज माधव
माधव
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