मांग बढ़ने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार
रमण
- 10 Jun 2026, 09:03 PM
- Updated: 09:03 PM
नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) सूरजमुखी और बिनौला तेल के मुकाबले सस्ता होने के बीच मांग बढने के कारण बुधवार को स्थानीय कारोबार में मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार देखने को मिला। कम आवक और अचार बनाने वाली कंपनियों की मांग के कारण सरसों तेल-तिलहन के दाम में भी सुधार आया।
बाजार सूत्रों के अनुसार वहीं कम उपलब्धता की वजह से बिनौला तेल और महाराष्ट्र में प्लांट वालों द्वारा खरीद दाम बढ़ाने के कारण सोयाबीन तिलहन में भी मजबूती देखी गई। सामान्य और सुस्त कामकाज के बीच सोयाबीन तेल और कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल कीमतें स्थिर रहीं।
मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में सुधार है। मंगलवार रात भी शिकॉगो एक्सचेंज सुधार के साथ बंद हुआ था।
सूत्रों ने कहा कि सूरजमुखी तेल के मुकाबले मूंगफली तेल 7-8 रुपये किलो सस्ता है जबकि बिनौला तेल के मुकाबले यह 1-2 रुपये किलो सस्ता है। सस्ता होने के कारण मूंगफली तेल की मांग बढ़ी है जिसकी वजह से मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में सुधार है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति इस बात का सूचक है कि जब मौजूदा समय में विदेशी खाद्यतेलों के दाम ऊंचे हैं तो घरेलू उत्पादन वाले तेल हमें सस्ता मिल रहे हैं। यह तेल-तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के मकसद से घरेलू तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने की जरुरत को रेखांकित करता है। यह हमारे देश के हित में है।
सूत्रों ने कहा कि कम आवक और अचार बनाने वाली कंपनियों की बढ़ती मांग के कारण सरसों तेल-तिलहन के दाम में भी सुधार आया। इस बार सरसों की खपत भी ज्यादा है क्योंकि कुछ समय पहले ही सरसों तेल का दाम आयातित तेलों से 7-8 रुपये किलो सस्ता था। कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौला तेल के दाम में भी सुधार आया।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लातूर में प्लांट वालों द्वारा खरीद दाम बढ़ाये जाने के कारण सोयाबीन तिलहन का दाम भी मजबूत रहा। लातूर के प्लांट वालों ने सोयाबीन का खरीद दाम बढ़ाकर 7,450 रुपये क्विंटल कर दिया है। हालांकि आयातक अभी भी लागत से नीचे दाम पर सोयाबीन तेल तथा पाम-पामोलीन तेल की बिक्री कर रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि लागत से नीचे दाम पर बिक्री की आम प्रवृति बन चली है। इसी आदत ने हमें निरंतर आयात पर निर्भर बनाया है। इससे बैंकों को घाटा हो रहा है और देश के विदेशीमुद्रा का नुकसान है। लेकिन इस गिरावट का लाभ आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाता। लागत से नीचे दाम की बिक्री से ना तो विदेशीमुद्रा का, ना ही किसानों को और ना ही आम उपभोक्ताओं को कोई लाभ हो रहा है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 7,725-7,750 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,650-7,225 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,600 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,475-2,775 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 15,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,605-2,705 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,605-2,750 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 13,800 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 16,025 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,600 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 14,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 7,075-7,125 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 6,925-7,000 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण
1006 2103 दिल्ली