'डिजिटल लत' वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक : राज्यपाल रमेन डेका
संजीव, रवि कांत रवि कांत
- 05 Jun 2026, 08:37 PM
- Updated: 08:37 PM
रायपुर, पांच जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने 'डिजिटल लत' को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए शुक्रवार को कहा कि युवा पीढ़ी को डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता और 'पॉपकॉर्न मानसिकता' से बाहर निकलने की आवश्यकता है, जो गहराई से सोचने की क्षमता को प्रभावित करती है।
डेका ने यहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, ''डिजिटल लत वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। युवा पीढ़ी को डिजिटल लत और 'पॉपकॉर्न मानसिकता' से बाहर आना होगा, जो गहराई से सोचने की क्षमता को प्रभावित करती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करती है।''
राज्यपाल ने कहा कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से 30 दिनों के भीतर डिजिटल लत पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
उन्होंने बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से दूर रखने तथा उन्हें खेलकूद और बाहरी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
डेका ने कहा, ''आज बच्चे सीमित दायरे (घर के भीतर) में रह रहे हैं, जिसका असर उनकी प्रतिरक्षा क्षमता और समग्र विकास पर भी पड़ रहा है।''
दीक्षांत समारोह में स्नातक उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डेका ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है।
उन्होंने कहा, ''मैं राज्यपाल के रूप में राज्य की जनता के प्रति जवाबदेह हूं। उसी प्रकार चिकित्सकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहें।''
उन्होंने युवा चिकित्सकों से उच्चतम नैतिक मानकों का पालन करने और रोगी कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने पड़ोस और पारिवारिक चिकित्सक की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि 'गोल्डन आवर' के दौरान समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप अक्सर जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग से जुड़े हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य क्षेत्र में नयी संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
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