'15 लाख करोड़ रुपये के घोटाले' की जिम्मेदारी सरकार में कौन लेगा : कांग्रेस
मनीषा
- 05 Jun 2026, 05:19 PM
- Updated: 05:19 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) कांग्रेस ने सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण क्षेत्र की कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) से जुड़े मामले को लेकर शुक्रवार को सवाल किया कि ''15 लाख करोड़ रुपये के घोटाले'' की जिम्मेदारी सरकार में कौन लेगा तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कुंभकर्ण की नींद से कब जागेगा ?
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार और पूंजी बाजार नियामक सेबी इस मामले पर महीनों तक कुंडली मारकर बैठे रहे, जबकि यह एलआईसी के करोड़ों निवेशकों तथा छोटे शेयरधारकों के हित से जुड़ा मामला था।
खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ''तीन जून, 2026 को सेबी का आदेश आया कि राजेश मेहता और उनकी कंपनी को ट्रेडिंग करने से रोक दिया गया है। मगर सवाल यह है कि सेबी को इस मामले में करना क्या चाहिए था?''
उन्होंने कहा कि भारत में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए जो नियम बने हैं, उन नियमों का हवाला देते हुए सेबी को राजेश एक्सपोर्ट्स से जानकारियां मांगनी चाहिए थीं।
उनका कहना था, ''सेबी को राजेश एक्सपोर्ट्स से उसके कैश फ्लो के बारे में पूछना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस मामले में फोरेंसिक ऑडिट जैसा कदम उठाया जाना चाहिए था, लेकिन सेबी शिकायत पर सात महीने तक कुंडली मारकर बैठी रही।''
खेड़ा ने सवाल किया, ''राजेश एक्सपोर्ट्स ने पांच साल में 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व दिखा दिया, लेकिन उसके रिकॉर्ड बिना सत्यापन के स्वीकार कर लिए गए, आखिर ऐसा किसके कहने पर किया गया?''
उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई, सेबी और एसएफआईओ जैसी एजेंसियां क्या कर रही थीं?
कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी किया, ''क्या मोदी सरकार को इस बारे में नहीं पता था कि इतना बड़ा घोटाला हो रहा है, अगर पता था तो किसे बचाया जा रहा था? इस घोटाले की, निवेशकों को हुए नुकसान की और एलआईसी के साथ हुए धोखे की जिम्मेदारी कौन लेगा.. नरेन्द्र मोदी लेंगे या निर्मला सीतारमण?''
खेड़ा ने कहा, ''हम जानना चाहते हैं कि कुंभकर्ण की नींद सोने वाली ईडी कब जागेगी?''
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का एकीकृत राजस्व बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने आरईएल के प्रवर्तक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में लेनदेन से अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके साथ ही कंपनी को वित्तीय विवरण और संबंधित पक्षों के लेनदेन का सही और पारदर्शी खुलासा करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय अनियमितता के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसके राजस्व के आंकड़े सही हैं और सेबी के साथ जानकारी साझा करने या समझ में अंतर के कारण यह स्थिति बनी हो सकती है।
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हक मनीषा
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