स्थानीय निवासियों ने दमकल टीम के देर से पहुंचने का आरोप लगाया, डीएफएस का इनकार
माधव
- 03 Jun 2026, 09:58 PM
- Updated: 09:58 PM
नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बुधवार को आरोप लगाया कि दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर देर से पहुंची। उन्होंने दावा किया कि अगर वे जल्दी आ गए होते तो कई जानें बचाई जा सकती थी। वहीं, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने आरोपों को खारिज कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, हौज रानी इलाके में 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
होटल के ठीक सामने वाली इमारत की मालकिन अंजुम ने बताया कि उन्हें सबसे पहले तब कुछ गड़बड़ का आभास हुआ जब वह सुबह-सुबह अपने पिता को दवा देने उनके कमरे में गईं।
उन्होंने दावा किया, "हमें कुछ गंध आई, लेकिन हमने सोचा कि शायद कुछ और हो। फिर एक चिंगारी निकली और देखते ही देखते इमारत में आग लग गई। दमकलकर्मियों को सुबह करीब आठ बजे सूचित कर दिया गया, लेकिन वे देर से पहुंचे। अगर वे पहले आ जाते, तो जानमाल का नुकसान रोका जा सकता था।"
अंजुम ने बताया कि होटल में मौजूद कई लोग बुरी तरह झुलस गए, और कइयों ने इमारत से कूदकर जान बचाने की कोशिश की।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया कि आपातकालीन टीमों के पहुंचने से पहले इलाके के लोगों को बचाव कार्य का नेतृत्व करना पड़ा।
उन्होंने कहा, "आसपास की इमारतों के लोगों ने रस्सियों की मदद से फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की और सड़क पर गद्दे बिछाए ताकि इमारत से कूदने पर उन्हें चोट न लगे।"
स्थानीय निवासी ने कहा, "तपिश और धुएं के कारण हम अपने घरों के अंदर भी नहीं रह पा रहे थे। अगर बाहर इतना भीषण प्रभाव था, तो (होटल के) अंदर फंसे लोग कैसे बच रहे होंगे?"
हालांकि, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के एक अधिकारी ने बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की देरी से इनकार किया।
अधिकारी ने कहा, "हमें सुबह 8:50 बजे सूचना मिली और हमने तुरंत सात वाहन घटनास्थल पर भेजे। बचाव अभियान भी बिना किसी देरी के चलाया गया। दमकल विभाग की ओर से भी कोई देरी नहीं हुई।"
इस बीच, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अन्य लोगों को बचाते समय 10 पुलिसकर्मी बीमार पड़ गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "बिना एक पल भी सोचे, पुलिसकर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया। पीसीआर को सूचना मिलते ही हमारी टीमें मौके पर पहुंच गईं।"
अधिकारियों ने बताया कि बुधवार सुबह हौज रानी स्थित होटल में आग लगने के बाद वहां से मेहमानों को निकालते समय मालवीय नगर थाने के कर्मियों को घने धुएं के संपर्क में आने के बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
उन्होंने बताया कि सभी की हालत स्थिर है और वे निगरानी में हैं।
बचाव दल में शामिल एक हेड कांस्टेबल ने बताया कि वह और उसके साथी प्रवेश द्वार से इमारत में दाखिल हुए और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश में कई मंजिलें चढ़े।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "जब हम सुबह करीब 9 या 9:15 बजे पहुंचे, तब तक बहुत धुआं भर चुका था। हमारी प्राथमिकता अंदर फंसे लोगों को बचाना थी और हम लोगों को बाहर निकालने के लिए दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल तक पहुंच गए।"
पुलिस कर्मी ने बताया कि उनकी टीम पांच पीड़ितों को सुरक्षित निकालने में कामयाब रही, लेकिन आग की भीषणता ने उन्हें भी जकड़ लिया। इमारत से बाहर निकलते ही पुलिसकर्मियों को सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी और जी मतली करने लगा तथा कुछ कर्मी बेहोश हो गए।
बीमार पड़े एक अन्य पुलिसकर्मी ने बताया कि कैसे विशेष उपकरणों की बिना टीम ने तात्कालिक उपाय अपनाए।
हेड कांस्टेबल ने बताया कि पहली मंजिल पर फंसी दो महिलाओं को बाथरूम के एक संकरे द्वार से निकाला गया। उन्होंने अंदर जाने के लिए एक शीशा तोड़ा।
उन्होंने बताया कि निकास द्वार इतना संकरा था कि पुलिसकर्मियों को भी उससे गुजरने में काफी मशक्कत करनी पड़ी और उनके चारों ओर आग की लपटें तेज होती जा रही थीं।
ऊपरी मंजिलों पर, कई विदेशी नागरिक और मरीजों के साथ आए तीमारदार घने धुएं में फंस गए थे।
हेड कांस्टेबल के अनुसार, बचाव दल ने सीढ़ियों का उपयोग करके उन तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन वे सीढ़ियों को तीसरी मंजिल तक नहीं पहुंचा सके।
बचावकर्मी ने बताया कि उन्होंने लगभग 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उठाया, जो बार-बार टीम से उसे वहीं छोड़ने का आग्रह कर रही थी क्योंकि हाल ही में उसकी सर्जरी हुई थी।
हेड कांस्टेबल ने बताया कि उनकी टीम ने इमारत की अलग-अलग मंजिलों से कुल पांच लोगों को निकाला, जिनमें तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल थे।
उन्होंने कहा, "बाहर निकलने के लिए मैंने शीशा तोड़ा, लेकिन टूटे हुए कांच से मुझे चोट लग गई। हमारे पास बचाव के लिए कोई उपकरण नहीं था।"
अधिकारियों के मुताबिक, बीमार पड़ने वाले कर्मियों में हेड कांस्टेबल करतार (32), हरज्ञान (40), प्रेमचंद (40), जितेंद्र (40) और दिनेश (35), तथा कांस्टेबल विक्रम (34), दीपक (38), रामपाल (30), संदीप (30) और रविरंजन (26) शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि सभी कर्मियों को इलाज के लिए तत्काल एम्स ले जाया गया और उनकी हालत स्थिर है।
भाषा नोमान
नोमान माधव
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