सीबीएसई ओएसएम प्रणाली: छात्रों का आरोप- स्कैन कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खाती
नरेश
- 25 May 2026, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों और विसंगतियों की बढ़ती शिकायतों के बीच कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खाती, जिससे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में संभावित गड़बड़ी को लेकर चिंता उत्पन्न होती है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इन आरोपों पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
दिल्ली के एक छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया पर किये गए एक विस्तृत पोस्ट में आरोप लगाया कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई भौतिकी (फिजिक्स) की उत्तर पुस्तिका उसकी नहीं है।
इस पोस्ट को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर 25 लाख व्यूज मिले हैं। छात्र ने पोस्ट में लिखा है कि उसने (छात्र) और उसके परिवार ने पाया कि सीबीएसई द्वारा मुहैया करायी गई फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका में लिखावट उसकी लिखावट से मेल नहीं खाती।
हालांकि, कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने शुरुआत में छात्र को 'ट्रोल' किया और सवाल किया कि हाल में ही बनाया गया हैंडल क्या वास्तव में एक सीबीएसई छात्र का ही है। कुछ ने उसे "राष्ट्र-विरोधी" और "पाकिस्तानी" तक कह दिया, लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कुछ लोग उसके बचाव में सामने आये।
छात्र ने लिखा, "कम अंक मिलने के बाद हमने सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी। आज हमें कॉपी मिली। और मैं बेहद निराश हूं क्योंकि सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई भौतिकी की उत्तर पुस्तिका मेरी नहीं है।''
उसने दावा किया कि फिजिक्स (भौतिकी) की उत्तर पुस्तिका की लिखावट उसकी अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाओं और उसके नोट्स से पूरी तरह अलग है।
छात्र ने कहा, "लिखावट की शैली, अक्षरों का आकार, स्पेसिंग, झुकाव और वाक्य प्रवाह—सब कुछ अलग है।"
वेदांत ने आरोप लगाया कि भौतिकी की उत्तर पुस्तिका "पूरी तरह से किसी अन्य छात्र की प्रतीत होती है" और सवाल उठाया कि क्या वास्तव में उसके ही पेपर का मूल्यांकन किया गया था।
छात्र ने कहा, "अगर यह सच है, तो मेरे रोल नंबर के तहत वास्तव में किसका मूल्यांकन किया गया? मेरा पेपर? या किसी और का?" छात्र ने साथ ही यह भी कहा कि यह अब केवल "पुनः जाँच" (रीचेकिंग) का मुद्दा नहीं रह गया है।
छात्र ने सीबीएसई से उसकी मूल उत्तर पुस्तिका की जांच करने, ओएसएम टैगिंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट करने, उत्तर पुस्तिकाओं के संभावित बदले जाने की जांच करने और सही पेपर का मूल्यांकन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
इस बीच, वेदांत के भाई सिद्धांत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर आलोचनाओं पर कहा कि परिवार ने यह मुद्दा उठाने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाया है। श्रीवास्तव ने कहा, "मैं वेदांत का भाई हूं और यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ है कि लोग हमें पाकिस्तानी कह रहे हैं। हां, वेदांत के पास ट्विटर अकाउंट नहीं था क्योंकि वह ट्वीट करने के बजाय पढ़ाई में व्यस्त रहता था और हमने उसके वास्तविक मुद्दों को ट्वीट करने के लिए यह अकाउंट बनाया क्योंकि हम पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर सके।"
इस बीच, कक्षा 12 की एक एक अन्य छात्रा संजना ने भी सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान उसे जो केमिस्ट्री की उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मिली, वह उसकी लिखावट से मेल नहीं खाती।''
संजना ने कहा कि उसे केमिस्ट्री थ्योरी के 70 में से केवल 11 अंक मिले, जबकि उसे इससे कहीं अधिक अंक की उम्मीद थी, जिससे वह ''हैरान'' रह गई।
छात्रा ने कहा, ''पहले तो मुझे लगा कि स्कैन की गई कॉपी धुंधली होगी, लेकिन वह मेरी उत्तर पुस्तिका से बिल्कुल मेल नहीं खाती; हर पृष्ठ पर किसी और की लिखावट प्रतीत होती है। लिखावट बिल्कुल भी मेल नहीं खाती।''
छात्रा के अनुसार, उत्तर पुस्तिका का पहला पृष्ठ जिस पर उसकी व्यक्तिगत जानकारी थी, वह तो उसका लग रहा था, लेकिन अंदर के पृष्ठों पर उसकी लिखावट मेल नहीं खा रही थी।
छात्रा ने आरोप लगाते हुए कहा, ''अंदर एक भी पृष्ठ मेरा नहीं है प्रतीत हो रहा था। छात्रा ने कहा कि उसने सीबीएसई को ईमेल किया है और हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है, लेकिन फोन पर उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
बाद में कई अन्य छात्रों ने भी सोशल मीडिया पर इसी तरह की समस्याओं का आरोप लगाया। ये आरोप सीबीएसई की परिणाम के बाद की सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों, जिनमें धुंधली स्कैन कॉपी, पृष्ठ कथित रूप से गायब होने और अंकों में विसंगतियां शामिल हैं, को लेकर कई छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बीच आए हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि आईआईटी-मद्रास और आईआईटी-कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञ इस वर्ष की परीक्षोत्तर पुनर्मूल्यांकन सेवाओं के शुरू होने के बाद से सामने आई सभी तकनीकी समस्याओं की जांच करेंगे और सीबीएसई को त्रुटिरहित प्रक्रिया सुनिश्चित करने में सहायता करेंगे।
भाषा अमित नरेश
नरेश
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