न्यायालय पारसी महिला से भेदभाव के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगा
नरेश
- 25 May 2026, 07:35 PM
- Updated: 07:35 PM
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय उस याचिका पर 29 मई को सुनवाई करने पर राजी हो गया है जिसमें नागपुर पारसी पंचायत को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह किसी पारसी महिला के साथ उसके पुरुष समकक्षों के समान व्यवहार करे, भले ही उसने किसी अन्य धर्म के व्यक्ति से विवाह किया हो।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि वह अंतरिम आदेश पारित कर सकती है, क्योंकि पारसी महिला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि उसके मुवक्किल को प्रियजनों के निधन पर नागपुर के अग्नि मंदिर में प्रार्थना में शामिल होने की अनुमति दी जाए। दीवान याचिकाकर्ता दीना बुधराजा की ओर से पेश हुए जिन्होंने अपना धर्म बदले बिना एक हिंदू पुरुष से विवाह किया है।
बुधराजा को 2024 में उनकी दादी के अंतिम संस्कार के लिए पारसी अग्नि मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश ने प्रारंभ में कहा कि नौ न्यायाधीशों की पीठ ने हाल ही में शबरिमला मंदिर सहित विभिन्न धर्मों की महिलाओं के साथ कथित भेदभाव से संबंधित एक बड़े प्रश्न पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और दीवान को परिणाम की प्रतीक्षा करने को कहा।
लेकिन दीवान ने इस मामले में अंतरिम राहत प्रदान करने का अनुरोध किया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''पारसी महिला बनाम पारसी पुरुष के अधिकारों का यह मामला पहले भी हमारे समक्ष उठाया जा चुका है।'' उन्होंने नागपुर पारसी पंचायत के वकील को इस मामले में 'कुछ अंतरिम व्यवस्था' के लिए निर्देश लेने को कहा।
पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख 29 मई तय की है।
बुधराजा द्वारा दायर याचिका पर शीर्ष न्यायालय ने केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और धर्मार्थ आयुक्त को नोटिस जारी किया।
वकील रोहित अनिल राठी के माध्यम से दायर याचिका में अनुरोध किया गया है कि नागपुर पारसी पंचायत के संविधान के नियम 5(2) को निरस्त करने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि यह भारत के संविधान का उल्लंघन करता है और महिलाओं के साथ भेदभाव करता है।
याचिका में नागपुर पारसी पंचायत से यह घोषणा करने का भी अनुरोध किया गया है कि वह पारसी पुरुषों और पारसी महिलाओं के साथ समान व्यवहार करे और एक पारसी महिला दूसरे धर्म के पुरुष से विवाह करने के बाद भी पारसी बनी रहे।
याचिका में यह घोषणा करने का भी अनुरोध किया गया है कि याचिकाकर्ता और इसी तरह की स्थिति वाली अन्य पारसी महिलाओं के प्रति उसी तरह का व्यवहार किया जाए जो दूसरे धर्म की महिला से विवाह करने वाले पारसी पुरुषों के साथ किया जाता है।
इससे पहले दीवान ने नागपुर पारसी पंचायत के संविधान के नियम 5(2) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।
अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में कहा गया है कि यह नियम भेदभावपूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
नागपुर पारसी पंचायत के संविधान के नियम 5(2) के अनुसार, गैर-पारसी पुरुष से विवाह करने पर पारसी महिलाओं की धार्मिक पहचान और अग्नि मंदिर जैसे धार्मिक संस्थानों में प्रवेश का अधिकार छिन जाता है।
भाषा संतोष नरेश
नरेश
2505 1935 दिल्ली