अन्नाद्रमुक के तीन बागी विधायकों ने इस्तीफा सौंपा, टीवीके में शामिल होने की संभावना
जोहेब
- 25 May 2026, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
चेन्नई, 25 मई (भाषा) वरिष्ठ नेता सी.वी. षणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के बागी गुट से जुड़े तीन विधायकों ने सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जे.सी.डी प्रभाकर से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। इन विधायकों के सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल होने की अटकलें हैं।
विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के तुरंत बाद तीनों विधायकों (मदुरंथकम से निर्वाचित एम. कुमारवेल, धारापुरम से निर्वाचित सत्यभामा और पेरुंदुरई से चुने गए जयकुमार) ने टीवीके सरकार में मंत्री आधव अर्जुन से उनके कक्ष में मुलाकात की। माना जा रहा है कि कुमारवेल, सत्यभामा और जयकुमार तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो सकते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने अन्नाद्रमुक के टिकट पर चुनाव जीतने वाले तीनों विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
इस बीच, पांच अन्य विधायक षणमुगम-वेलुमणि गुट छोड़कर पार्टी प्रमुख ई.के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले खेमे में वापस चले गए।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर षणमुगम ने संवाददाताओं से कहा, "बाद में बात करेंगे।"
तीनों विधायकों ने यहां सचिवालय में प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। धारापुरम (तिरुप्पुर) और पेरुंदुरई (इरोड) पश्चिमी तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र में आते हैं और अन्नाद्रमुक के पारंपरिक गढ़ रहे हैं। मदुरंथकम चेन्नई के पास स्थित है।
कुमारवेल, सत्यभामा और जयकुमार उन 25 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करते हुए मुख्यमंत्री विजय के विश्वास मत हासिल करने के दौरान टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया था।
इस बीच, षणमुगम-वेलुमणि गुट में शामिल अन्नाद्रमुक के पांच विधायक फिर से पलानीस्वामी के खेमे में चले गए। इसके साथ ही विधानसभा में पलानीस्वामी समर्थक विधायकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई।
वेलुमणि गुट छोड़ने वाले विधायकों में एस.एम. सुकुमार (आर्कोट) भी शामिल हैं।
तीन विधायकों के इस्तीफे और पांच विधायकों के पलानीस्वामी खेमे में लौटने के बाद, बागी गुट में शामिल विधानसभा सदस्यों की संख्या अब 25 से घटकर 17 रह गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं, जिसके बाद तमिलनाडु में चार विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने की संभावना बन गई है। इन सीट में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से खाली की गई तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट भी शामिल है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने संवाददाताओं को बताया कि अन्नाद्रमुक के तीनों विधायकों के इस्तीफे तय प्रक्रिया के अनुसार सही प्रारूप में मिले, इसलिए उन्हें स्वीकार कर लिया गया।
उन्होंने कहा, "इस्तीफा देने के लिए कारण बताना जरूरी नहीं है।"
विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के 21 दिन के अंदर अन्नाद्रमुक में इस टूट को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं, द्रमुक को भी झटका लगा है, क्योंकि उसके सहयोगी दल कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल टीवीके सरकार में शामिल हो गए हैं, जबकि वाम दलों ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया है।
इस बीच, अन्नाद्रमुक के षणमुगम गुट का समर्थन करने वाले पांच विधायकों ने पलानीस्वामी के ग्रीनवेज रोड स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की और उनके खेमे में लौट गए। बाद में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर कहा कि वे अब पलानीस्वामी के नेतृत्व में काम करेंगे।
पलानीस्वामी गुट में लौटे विधायकों में एस.एम. सुकुमार (आर्कोट), पी. हरिबास्कर (अंथियूर), दिलीपन जयशंकर (शंकरकोइल), एन.एस.एन. नटराजन (कांगयम) और के. मोहन (पणरुति) शामिल हैं।
सुकुमार ने कहा कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा है, जिसमें बहुमत परीक्षण के दौरान हुई कुछ गलतियों पर खेद जताया गया है। पत्र में कहा गया है कि सभी पांच विधायकों ने पलानीस्वामी के नेतृत्व में काम करने का फैसला किया है।
इस बीच, अन्नाद्रमुक के सांसद और पार्टी के अधिवक्ता विंग के सचिव आई.एस. इन्बादुरई ने तीन विधायकों के इस्तीफे के कदम को "विधायकों की खरीद-फरोख्त" बताया।
द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता पी. विल्सन ने भी टीवीके पर निशाना साधते हुए कहा कि निर्वाचित विधायकों का 21 दिन में इस्तीफा देकर तुरंत टीवीके में शामिल होने की तैयारी करना दल-बदल कानून से बचने की कोशिश है, जो कि निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि सरकारी सचिवालय परिसर और कार्यालयों का इस्तेमाल राजनीतिक दलों में शामिल होने के लिए किया जाना अनुचित है।
भाषा जोहेब पारुल
पारुल
जोहेब
2505 1913 चेन्नई