शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ 35 वर्षों के संबंधों पर पुस्तक लिखी
सुरेश
- 23 May 2026, 07:45 PM
- Updated: 07:45 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नयी किताब में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "असाधारण गर्मजोशी और संवेदनशीलता" ने उन्हें 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक संकट से उबारने में मदद की।
चौहान ने 'अपनापन' नामक इस पुस्तक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने 35 वर्षों के संबंधों और अनुभवों का वर्णन किया है।
किताब में वर्णित अंशों के अनुसार, जब भाजपा ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, तो चौहान ने सोचा कि पहले उन सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे, जहां भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही थी।
उन्होंने लिखा, "मेरा नाम शुरुआती सूचियों में शामिल नहीं था।"
किताब के अनुसार, इसी दौरान एक जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य में विकास का उल्लेख करते हुए कहा था, "अगर हम नहीं रहे, तो हमें बहुत याद किया जाएगा।"
उन्होंने लिखा कि विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और यह प्रचारित किया कि चौहान का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया है।
चौहान ने लिखा कि विपक्ष के कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया।
मौजूदा कृषि मंत्री चौहान ने कहा, "उन्होंने (विपक्ष ने) यह तक कह दिया कि मामाजी का तो राजनीतिक अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।"
चौहान ने किताब में लिखा कि कांग्रेस पार्टी ने "गलत सूचना" को अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य आधार बना लिया और उनके बयान को "तोड़-मरोड़कर पेश" करते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
उन्होंने लिखा, "शायद वे हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना चाहते थे। मुझे भी लगा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और गलत धारणा को तोड़ने के लिए कुछ करना चाहिए।"
केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि जब वह उस समय को याद करते हैं, तो उन्हें कांग्रेस की "मजाक उड़ाने वाली बातें" याद नहीं आतीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की "गहरी भावनात्मक संवेदनशीलता" सामने आती है।
उन्होंने कहा कि चुनाव अभियान के बीच बेहद व्यस्त होने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया।
चौहान ने किताब में लिखा, "उन्होंने (मोदी ने) मुझे मुख्यमंत्री के रूप में संबोधित नहीं किया। बहुत गर्मजोशी और स्नेह के साथ उन्होंने कहा, 'आज मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं, न ही चुनावों के संदर्भ में फोन कर रहा हूं। मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।"
उन्होंने किताब में कहा कि प्रधानमंत्री ने बहुत ही नरमी से पूछा, "आप इतने चिंतित क्यों हो? अगर आपका कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शक या गुरु है, जिनका आप सम्मान करते हैं, तो उनके पास जाकर मार्गदर्शन लें। कुछ समय एकांत में बिताएं और अपने मन को शांत, संतुलित एवं स्थिर रखें।"
चौहान ने लिखा कि उन्हें लगा कि शायद प्रधानमंत्री यह सोच रहे थे कि "मुझे कुछ आश्वासन की जरूरत हो सकती है''।
केंद्रीय मंत्री ने लिखा, "मैंने उनसे कहा, 'भाई साहब, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं सिर्फ काम करना चाहता हूं।"
चौहान के अनुसार, इसपर मोदी ने जवाब दिया, "नहीं शिवराज, एक-दो दिन अकेले रहिए, अपना ध्यान रखिए, अपनी मानसिक स्थिति का ख्याल रखें और फिर काम में जुट जाएं।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने लिखा, "वह (मोदी) चाहते थे कि मैं कुछ समय के लिए रुकूं, अपने ऊपर ध्यान दूं और आंतरिक शक्ति को फिर से जागृत करुं, उनका स्नेह मेरे मन को गहराई से छू गया। जो नेता पूरे देश की जिम्मेदारियों का भार उठाए हुए हैं, वह मेरे व्यक्तिगत मानसिक हालात की भी चिंता कर रहे थे; यही वास्तविक संवेदनशीलता है।"
चार बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चौहान ने लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की सलाह मान ली और उत्तराखंड चले गए।
चौहान ने लिखा, "ऋषिकेश से थोड़ी दूरी पर, मैं गंगा के किनारे एकांत में घंटों बैठा रहा। बहते पानी और अडिग पहाड़ों को देखते हुए मेरा मन धीरे-धीरे शांत होने लगा। तब मैं पूरी तरह समझ गया कि मोदी जी क्या चाहते थे। उनका स्नेह केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि रणनीतिक भी था।"
केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि मोदी अच्छी तरह समझते थे कि यदि भ्रामक मीडिया रिपोर्टों से उनका (चौहान) मनोबल कमजोर हुआ, तो उसका असर भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हो सकता है।
नयी दिल्ली में 26 मई को पूर्व उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की मौजूदगी में इस पुस्तक का आधिकारिक रूप से विमोचन किया जाएगा।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश
2305 1945 दिल्ली