एसकेएम ने 27 मई से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया
नरेश
- 22 May 2026, 09:20 PM
- Updated: 09:20 PM
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने शुक्रवार को 27 मई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।
एसकेएम ने किसान संगठनों और कृषि श्रमिकों से केंद्र सरकार के हालिया न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आदेश तथा 2026-27 खरीफ सत्र की मूल्य नीति पर कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की रिपोर्ट की प्रतियां जलाने का आह्वान किया है।
सीएसीपी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक विशेषज्ञ सलाहकार निकाय है, जो खरीफ और रबी सीजन की अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी की सिफारिश करता है।
एसकेएम ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र सरकार पर ''धोखाधड़ीपूर्ण'' एमएसपी व्यवस्था लागू करने, ईंधन की कीमतें बढ़ाकर किसानों पर बोझ डालने और उर्वरक स्थिति को गलत तरीके से संभालने का आरोप लगाया।
संगठन ने उर्वरकों और डीजल की बढ़ती कीमतों तथा कथित कालाबाजारी के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की।
दिल्ली की सीमाओं पर 2021-22 के किसान आंदोलन का नेतृत्व कर चुके एसकेएम ने कहा कि वह 2026-27 खरीफ सत्र के घोषित एमएसपी ढांचे, ईंधन कीमतों में हालिया वृद्धि और बिगड़ती उर्वरक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज करेगा।
एसकेएम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार खरीफ सीजन से पहले यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल रही है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों के कारण ईंधन तथा उर्वरकों की लागत बढ़ी है।
किसान संगठन ने हाल ही में घोषित खरीफ फसलों के एमएसपी को ''धोखा'' बताते हुए दावा किया कि सरकार ने एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग की उस सिफारिश को लागू नहीं किया, जिसमें व्यापक लागत (सी2) पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर एमएसपी तय करने की बात कही गई थी।
एसकेएम ने आरोप लगाया कि सरकार सीएसीपी के माध्यम से ऐसी लागत गणना पद्धति अपनाए हुए है, जो किसानों की उत्पादन लागत और श्रम का सही मूल्यांकन नहीं करती। संगठन ने इसे ''संगठित लूट'' करार दिया।
संगठन ने ईंधन कीमतों में हालिया वृद्धि को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि कृषि में डीजल की अहम भूमिका के बावजूद किसानों पर अत्यधिक कर का बोझ डाला जा रहा है।
एसकेएम ने ट्रैक्टरों और कृषि कार्यों के लिए डीजल पर कर-मुक्त या रियायती दर लागू करने तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर समेत अन्य करों को वापस लेने की मांग की।
उर्वरकों के मुद्दे पर संगठन ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) नीति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इससे डीएपी और पोटाश की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है तथा यूरिया की कमी और कालाबाजारी को बढ़ावा मिला है।
एसकेएम ने केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे को कमजोर करने का भी आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि राज्यों को एमएसपी बोनस देने से रोका जा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित कुछ राज्यों में अधिक खरीद मूल्य की अनुमति दी जा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए एसकेएम ने आरोप लगाया कि अमेरिका से सस्ते कृषि आयात की अनुमति देने से भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि उन्हें भारी सब्सिडी प्राप्त विदेशी कृषि उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी।
संगठन ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि सी2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर एमएसपी की कानूनी गारंटी और सार्वभौमिक खरीद सुनिश्चित की जाए, ईंधन मूल्य वृद्धि वापस ली जाए, उर्वरकों की कीमतें घटाई जाएं, एनबीएस नीति वापस ली जाए, कृषि मूल्य निर्धारण और कराधान पर राज्यों के अधिकारों का सम्मान किया जाए तथा कृषि श्रमिकों के ऋण तत्काल माफ किए जाएं।
आंदोलन की रूपरेखा के तहत संगठन ने 17 जून को राष्ट्रीय परिषद की बैठक और 28 जुलाई को नयी दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें भविष्य की रणनीति और किसान मांगों पर देशव्यापी आंदोलन के समन्वय पर निर्णय लिया जाएगा।
केंद्र सरकार का कहना है कि एमएसपी तय करते समय सीएसीपी की सिफारिशों और विभिन्न आर्थिक कारकों पर विचार किया जाता है, जबकि उर्वरक सब्सिडी तथा ईंधन मूल्य निर्धारण की समय-समय पर व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाती है।
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