गैर-पंजीकृत इकाइयों की संख्या नौ करोड़, रोजगार का आंकड़ा 15 करोड़ के पार: सरकारी सर्वेक्षण
अजय
- 21 May 2026, 06:56 PM
- Updated: 06:56 PM
नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) देश में गैर-पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़कर नौ करोड़ से अधिक हो गई है जबकि जनवरी-मार्च तिमाही में इन इकाइयों में रोजगार का आंकड़ा 15 करोड़ के पार पहुंच गया है। एक सरकारी सर्वेक्षण में यह कहा गया।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बृहस्पतिवार को इस साल जनवरी-मार्च तिमाही के लिए कृषि क्षेत्र से इतर गैर-पंजीकृत इकाइयों के अनुमान जारी किए।
एनएसओ 2025 से गैर-पंजीकृत गैर-कृषि क्षेत्र के प्रमुख निष्कर्षों पर तिमाही बुलेटिन प्रकाशित कर रहा है।
जनवरी-मार्च, 2026 के लिए गैर-पंजीकृत क्षेत्र उद्यमों पर तिमाही बुलेटिन गैर-पंजीकृत क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) का तिमाही संस्करण है। यह नियमित अंतराल पर प्रमुख अनुमान प्रदान करता है।
सर्वेक्षण के अनुसार, गैर-पंजीकृत क्षेत्र के उद्यमों पर तिमाही बुलेटिन (क्यूबीयूएसई) की शुरुआत भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक पर नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य पक्षों को समय पर और उपयोगी आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए एनएसओ के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
गैर-कृषि क्षेत्र में प्रतिष्ठानों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 16.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जनवरी-मार्च, 2026 के दौरान गैर-कृषि इकाइयों की अनुमानित संख्या बढ़कर 9.16 करोड़ हो गई, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.85 करोड़ थी।
ग्रामीण क्षेत्र इस वृद्धि का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जिसमें 20.46 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई। शहरी क्षेत्र में इसी अवधि के दौरान 12.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आलोच्य तिमाही में गैर-कृषि क्षेत्र में गैर-पंजीकृत इकाइयों में रोजगार 15.17 करोड़ तक पहुंच गया। यह पहली बार है जब रोजगार का आंकड़ा 15 करोड़ को पार कर गया।
इस क्षेत्र में पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 15.51 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो विभिन्न क्षेत्रों में आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में इसके बढ़ते महत्व को बताती है।
आलोच्य तिमाही में गैर-पंजीकृत क्षेत्र में कार्यरत मालिकों का कार्यबल में सबसे बड़ा हिस्सा बना रहा। कुल कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी 60.97 प्रतिशत रही जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 58.29 प्रतिशत थी।
इसके उलट, पारिश्रमिक पर रखे गये श्रमिकों के हिस्से में मामूली गिरावट देखी गई। इसी अवधि में इनकी हिस्सेदारी घटकर 24.77 प्रतिशत आ गयी जो एक साल पहले इसी तिमाही में 26.86 प्रतिशत थी।
जनवरी-मार्च, 2026 की तिमाही में गैर-पंजीकृत सेवा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। प्रतिष्ठानों की संख्या और रोजगार में पिछले वर्ष की तुलना में अच्छी वृद्धि हुई।
प्रतिष्ठानों की संख्या में 24.82 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में इस क्षेत्र में कार्यबल में 31.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
असंगठित अर्थव्यवस्था के भीतर सेवा क्षेत्र का यह मजबूत विस्तार इस क्षेत्र में बढ़ती उद्यमिता, रोजगार के प्रमुख चालक के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका और स्थानीय सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
भाषा रमण अजय
अजय
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