न्यायालय ने केजी बेसिन गैस विवाद में अंतिम सुनवाई स्थगित करने से इनकार किया
माधव
- 20 May 2026, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के उस अनुरोध को ठुकरा दिया, जिसमें कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस विवाद में सुनवाई को फिलहाल टाले जाने का आग्रह किया गया था। कंपनी और दो अन्य विदेशी फर्म ने केंद्र सरकार के साथ मध्यस्थता या सुलह के जरिए इस मुद्दे के सौहार्दपूर्ण समाधान की अपील की थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड की अपील पर सुनवाई कर रही है। ये अपील दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं, जिसने केंद्र के साथ गैस विवाद में कंपनियों के पक्ष में दिए गए मध्यस्थता निर्णय को रद्द कर दिया था।
इन कंपनियों ने उच्च न्यायालय के 14 फरवरी, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने एकल-न्यायाधीश पीठ के फैसले को रद्द कर दिया था। एकल-न्यायाधीश ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और इसके दो भागीदारों के पक्ष में आए मध्यस्थता निर्णय को बरकरार रखा था। उन पर आरोप था कि उन्होंने उन गैस भंडारों से कथित तौर पर गैस निकाली थी, जिसके दोहन का उनके पास कोई अधिकार नहीं था।
सुनवाई की शुरुआत में, याचिकाकर्ता कंपनियों के वकील ने पीठ को बताया कि वे केंद्र सरकार को सुलह या मध्यस्थता के प्रयास के लिए आज ही पत्र लिखेंगे।
कंपनियों की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत से कहा, ''सभी याचिकाकर्ता आज भारत सरकार को मध्यस्थता के लिए पत्र लिखेंगे... हम निवेदन कर रहे हैं कि पहले मध्यस्थता का प्रयास किया जाए।''
वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि मध्यस्थता का परिणाम आने तक मामले की सुनवाई रोक दी जाए।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत से आज सूचीबद्ध मामले में सुनवाई जारी रखने का अनुरोध किया।
पीठ ने कहा, ''अगर आप मध्यस्थता में सफल होते हैं तो बहुत अच्छी बात है। तब हम मामले का निपटारा कर देंगे।''
दिन में बाद में, आरआईएल की ओर से पेश हुए अभिषेक सिंघवी ने मामले में अपनी दलीलें शुरू कीं।
शीर्ष अदालत ने 19 मई को आरआईएल और उसकी साझेदार कंपनियों की उन अपील पर अंतिम सुनवाई शुरू की, जिनमें केंद्र के साथ उनके कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस विवाद में आए मध्यस्थता निर्णय को निरस्त करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
इससे पहले, जुलाई 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने आरआईएल और उसके साझेदारों के खिलाफ केंद्र के 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज करते हुए संबंधित कंपनियों को 83 लाख डॉलर का मुआवजा देने का फैसला सुनाया था।
मूल रूप से, ओएनजीसी ने रिलायंस पर केजी बेसिन में स्थित अपने ब्लॉक केजी-डीडब्ल्यूएन-98/2 (केजी-डी5) और गोदावरी पीएमएल से रिलायंस के सटे केजी-डी6 ब्लॉक में स्थानांतरित हुई गैस का उत्पादन करने के लिए मुकदमा दायर किया था।
भाषा नेत्रपाल माधव
माधव
2005 2223 दिल्ली