दवा विक्रेता हड़ताल: हिमाचल में मरीज और तीमारदार परेशान, सरकारी फार्मेसी में दवाओं की कमी
पारुल
- 20 May 2026, 09:17 PM
- Updated: 09:17 PM
शिमला, 20 मई (भाषा) शिमला में मरीजों और उनके तीमारदारों ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आहूत एक दिवसीय हड़ताल में शामिल होने के लिए दवा विक्रेताओं के अपनी दुकानें बंद रखने से उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
'ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' ने ऑनलाइन दवा कंपनियों के बिना नियमन के कारोबार करने और दवाइयों पर भारी छूट देने के विरोध में इस हड़ताल का आह्वान किया था।
मरीजों ने कहा कि हड़ताल की वजह से ज्यादातर निजी दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे उन्हें दवाएं खरीदने में काफी परेशानी हुई और कई अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ा। बंद दुकानों में बड़ी संख्या में वे दुकानें भी शामिल थीं, जो अस्पतालों के आसपास स्थित हैं।
बिलासपुर जिले के कोठीपुरा स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पास की दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे मरीजों, विशेषकर उन लोगों को काफी परेशानी हुई, जो दूर-दराज के इलाकों से आए थे। कुछ लोगों को डॉक्टरों की लिखी दवाइयां खरीदे बिना ही घर लौटना पड़ा।
कुल्लू के ढालपुर स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में भी मरीजों और उनके तीमारदारों को दवाएं ढूंढने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि डॉक्टरों की लिखी सभी दवाएं अस्पताल परिसर के भीतर सरकारी फार्मेसी में उपलब्ध नहीं थीं।
मंडी जिले के बाली चौकी से आई ऋतु देवी ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, "मेरी दादी अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टर की लिखी दवाइयां अस्पताल की फार्मेसी में उपलब्ध नहीं थीं। हमने कुल्लू के कई बाजारों में दवाइयां ढूंढीं, लेकिन सभी दवा की दुकानें बंद थीं।"
लाहौल घाटी के एक अन्य मरीज रामपाल ने बताया कि उसे जो दवाएं लिखी गई थीं, उनमें से कोई भी सरकारी फार्मेसी में उपलब्ध नहीं थी और निजी दवा दुकानें बंद थीं।
कुल्लू जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ऋषभ कालिया ने आरोप लगाया कि बिना किसी सख्त या उचित सरकारी निगरानी के ऑनलाइन मंच के माध्यम से पूरे देश में घरों तक अंधाधुंध दवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इससे नकली और अप्रमाणित फॉर्मूले के इस्तेमाल, एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और मादक पदार्थों की आसान उपलब्धता संबंधी चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
भाषा प्रचेता पारुल
पारुल
2005 2117 शिमला