न्यायालय ने राजस्थान सरकार को वन रक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया
माधव
- 20 May 2026, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राजस्थान सरकार को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के भीतर अवैध रेत खनन पर अंकुश लगाने के लिए वन रक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।
इसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है, जो 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला एक त्रिराज्य संरक्षित क्षेत्र है। लुप्तप्राय घड़ियाल (लंबे थूथन वाले मगरमच्छ) के अलावा, यह लाल मुकुट वाले कछुए और लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन का भी घर है।
राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रिकोणीय बिंदु के पास चंबल नदी पर स्थित, इस अभयारण्य को पहली बार 1978 में मध्यप्रदेश में एक संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था और अब यह तीनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित एक लंबा और संकरा पारिस्थितिकी आरक्षित क्षेत्र है।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपने पूर्व के निर्देशों का मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश द्वारा अनुपालन किए जाने के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया तथा कहा कि वह 26 मई को फैसला सुनाएगी।
शीर्ष अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किए गए इस मामले में अदालत मित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने पीठ को सूचित किया कि तीनों राज्यों ने अपने हलफनामे दाखिल कर अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन के लिए कार्ययोजना का संकेत दिया है, जिसमें अपंजीकृत वाहनों की निगरानी और पहचान, वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित करने और उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह एक अवसंरचनात्मक मुद्दा है, इसलिए राज्यों को निर्देशों के अनुपालन के लिए कुछ समय दिया जाना आवश्यक है।
राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत द्वारा तलब किए गए अधिकारियों के साथ पीठ को सूचित किया कि उन्होंने अवैध रेत खनन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संवेदनशील मार्गों की पहचान कर ली है, जिनमें घड़ियाल अभयारण्य में स्थित 40 मार्ग शामिल हैं, और क्षेत्र की निगरानी भी की जा रही है।
न्यायमूर्ति मेहता ने राज्य सरकार के वरिष्ठ वन अधिकारी से पूछा कि वन विभाग में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें वन रक्षकों के रिक्त पदों को भरना भी शामिल है।
अधिकारी ने बताया कि उन्होंने रिक्त पदों को भरने के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा है और वन रक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया में एक साल लगने की संभावना है।
न्यायमूर्ति मेहता ने अधिकारी से कहा, ''हमें पता चला है कि ये होमगार्ड वन विभाग के वाहन भी चला रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि न्यायालय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश पारित करेगा।
पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भाटी को यह भी निर्देश दिया कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित करें कि भर्ती प्रक्रिया शीघ्रता से शुरू हो।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता रुचिरा गोयल ने यह भी बताया कि राज्य सरकार अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और ऐसे अपंजीकृत वाहनों का चालान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भाषा
नेत्रपाल माधव
माधव
2005 2101 दिल्ली