क्या लैंगर-मूडी की जोड़ी ने एलएसजी का संयोजन पूरी तरह से बिगाड़ दिया?
पंत
- 20 May 2026, 01:34 PM
- Updated: 01:34 PM
(कुशान सरकार)
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) जब लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कोच जस्टिन लैंगर और आईपीएल के अनुभवी कोच टॉम मूडी की अगुवाई में अपना सहयोगी स्टाफ तैयार किया तो उम्मीद की जा रही थी कि यह फ्रेंचाइजी खिताब की असली दावेदार बन जाएगी।
लेकिन परिणाम इसके विपरीत रहे। आईपीएल के मौजूदा सत्र में टीम किसी भी समय सही संयोजन तैयार नहीं कर पाई।
टूर्नामेंट के लंबे दौर में ऐसा लग रहा था कि मुख्य कोच लैंगर और कप्तान ऋषभ पंत अलग-अलग रणनीति अपना रहे हैं। हार के बाद खिलाड़ियों के हाव-भाव, लगातार फेरबदल और बल्लेबाजी क्रम को लेकर अनिश्चितता, ये सब एक ऐसी टीम की ओर इशारा कर रहे थे जिसमें स्पष्टता का अभाव है।
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय स्वाभाविक रूप से मालिक संजीव गोयनका का पंत को 27.50 करोड़ रुपये में खरीदने का फैसला रहा। पंत भले ही भारत के सबसे बड़े क्रिकेट ब्रांड में से एक हैं और समकालीन भारतीय क्रिकेट में सबसे प्रभावशाली मैच विजेता खिलाड़ियों में गिने जाते हैं, लेकिन इस कदम से टीम का संतुलन बिगड़ गया और शायद अन्य स्थानों पर भी कुछ कमियां रह गईं।
एलएसजी के पास विदेशी तेज गेंदबाजों की कमी उसके लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब बन गया। दक्षिण अफ्रीका के एनरिच नोर्किया को छोड़कर एलएसजी के पास बीच के ओवरों या अंतिम ओवरों में मैच का रुख बदलने में सक्षम कोई प्रभावशाली विदेशी तेज गेंदबाज नहीं था। नोर्किया को भी केवल एक मैच खेलने का मौका मिला।
इससे सारा भार भारत के कम अनुभवी गेंदबाजों पर आ गया। भारतीय गेंदबाजों में भी केवल मोहसिन खान (11 विकेट) और प्रिंस यादव (16 विकेट) ने ही लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि मोहम्मद शमी बीच-बीच में ही प्रभावी दिखे। अन्य गेंदबाजों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
तेज गेंदबाज मयंक यादव ने केवल चार मैच खेले और एक भी विकेट लेने में असफल रहे। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह एक मैच में सधे हुए नजर आए, लेकिन अगले मैच में उनकी जमकर धुनाई हुई।
इसके बावजूद एलएसजी ने ऐसे संयोजन तैयार किये जिन पर सवाल उठना लाजिमी है। निकोलस पूरन लगातार नाकाम रहने के बावजूद टीम में बने रहे।
जब टीम प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर हो चुकी थी, तब बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को मौका न देने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं दिखता था। अर्जुन तेंदुलकर को एक भी मैच खेलने का मौका क्यों नहीं मिला। विडंबना यह है कि एलएसजी की सोशल मीडिया टीम ने 'अर्जुन तेंदुलकर यॉर्कर पैकेज' का काफी प्रचार किया, लेकिन टीम प्रबंधन ने उन्हें मौका देना उचित नहीं समझा।
क्रिकेट जगत में जहां भाई-भतीजावाद को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं, वहीं तेंदुलकर जूनियर का मामला लगभग उल्टा प्रतीत होता है। उन्हें हमेशा चुन लिया जाता है लेकिन अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया जाता है।
एलएसजी का मौजूदा आईपीएल में अभियान हार के लिए ही याद नहीं किया जाएगा बल्कि उसके फैसलों के लिए भी याद किया जाएगा।
भाषा
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2005 1334 दिल्ली