भोजशाला पर उच्च न्यायालय के फैसले से हिंदू समुदाय में खुशी की लहर,मोहन यादव ने 'महत्वपूर्ण क्षण'कहा
राजकुमार
- 15 May 2026, 09:27 PM
- Updated: 09:27 PM
धार (मध्यप्रदेश), 15 मई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किए जाने के बाद धार में हिंदू समुदाय के लोगों ने खुशी मनाई और फैसले को ''सत्य और न्याय की जीत'' बताया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च न्यायालय के फैसले को सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के सम्मान का ''महत्वपूर्ण क्षण'' करार देते हुए कहा कि सरकार भोजशाला की गरिमा, सामाजिक सद्भाव एवं भाईचारे को और मजबूत करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी फैसले पर खुशी जताई।
भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर अपने बहुप्रतीक्षित फैसले में उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि विवादित स्थल देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है तथा इसके प्रशासन और प्रबंधन पर केंद्र सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) निर्णय ले सकते हैं।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि 11वीं शताब्दी के एएसआई संरक्षित स्मारक को कमाल मौला मस्जिद मानने वाला मुस्लिम समुदाय मस्जिद निर्माण के लिए जिले में अलग भूमि आवंटन हेतु राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है।
हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता रहा है।
उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद भोजशाला परिसर के बाहर ज्योति मंदिर के पास हिंदू समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी। कुछ कार्यकर्ताओं ने नृत्य कर खुशी मनाई और सड़कों पर पटाखे फोड़े गए।
फैसले के बाद धार शहर में हिंदू समुदाय के बीच उत्साह और उल्लास का माहौल देखा गया।
धार स्थित प्रमुख हिंदू संगठन भोज उत्सव समिति के उपाध्यक्ष सुमित चौधरी ने कहा, ''हिंदू समुदाय का दशकों पुराना संघर्ष आज समाप्त हुआ है।''
उन्होंने कहा, ''यह जीत उन कार्यकर्ताओं को समर्पित है जिन्होंने 1935 में भोज उत्सव समिति की नींव रखी थी। यह उन हिंदू कार्यकर्ताओं की भी जीत है जिन्होंने आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और हमलों का सामना किया।''
चौधरी ने कहा कि धार का हिंदू समुदाय अदालत और इस फैसले को संभव बनाने वाले सभी पक्षों का आभार व्यक्त करता है।
भोजशाला आंदोलन से जुड़े युवा कार्यकर्ता केशव शर्मा ने कहा, ''आज हिंदू समुदाय बेहद खुश है। करीब 720 वर्षों का संघर्ष आज समाप्ति की ओर पहुंचा है। मैं इस आंदोलन में जान गंवाने वाले तीन लोगों और इसमें शामिल सभी कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।''
मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा, ''माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक और मां वाग्देवी के पूजा स्थल के रूप में मान्यता देना हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।''
उन्होंने कहा, ''एएसआई के संरक्षण और प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं के पूजा-अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे। मां वाग्देवी की प्रतिमा को ब्रिटेन से भारत वापस लाने पर विचार करने का निर्देश सराहनीय है। राज्य सरकार भी इस दिशा में आवश्यक प्रयास करेगी।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ''सर्वधर्म समभाव'', सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की वाहक रही है तथा राज्य सरकार अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए प्रदेश में सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने फैसले को ''सराहनीय'' बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरा सहयोग देगी।
फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उमा भारती ने 'एक्स' पर लिखा, ''माननीय उच्च न्यायालय ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर के रूप में मान्यता दी है। यह सिद्ध करने वाले सभी तथ्य पहले से स्पष्ट थे कि भोजशाला मंदिर है। इस फैसले से मैं अत्यंत प्रसन्न हूं।''
मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा, ''भोजशाला का निर्माण राजा भोज ने कराया था । यह सर्वविदित तथ्य है। बाद में हुए विध्वंस और बदलावों के प्रमाण अब उपलब्ध हैं। मैं माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं।''
उन्होंने कहा कि सत्य को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता और वहां मिले अवशेष इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह स्थल प्राचीन सरस्वती मंदिर और शिक्षा का केंद्र था।
हालांकि मुस्लिम समुदाय ने उच्च न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि वह इस निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा।
धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा, ''यह फैसला बहुत आश्चर्यजनक है। हमने जो तथ्य और हमारे वरिष्ठ अधिवक्ताओं सलमान खुर्शीद तथा शोभा मेनन ने जो दलीलें अदालत के समक्ष रखीं, उनके आधार पर हमें उम्मीद थी कि फैसला हमारे पक्ष में आएगा।''
भाषा सं दिमो राजकुमार
राजकुमार
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