चंडीगढ़ की सीमा पर प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले
पवनेश
- 15 May 2026, 07:47 PM
- Updated: 07:47 PM
(तस्वीर के साथ)
चंडीगढ़, 15 मई (भाषा) चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को ज्ञापन सौंपने के लिए शुक्रवार को लोक भवन की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे किसानों को तितर-बितर करने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं।
किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने, नदी जल विवाद के समाधान और पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले पूरे पंजाब से बड़ी संख्या में जुटे किसान मोहाली में एकत्र हुए और मोहाली-चंडीगढ़ सीमा से लोक भवन तक मार्च निकालने की कोशिश की।
किसान जब मोहाली-चंडीगढ़ सीमा के पास पहुंचे, तो कुछ प्रदर्शनकारी अवरोधक लांघकर दूसरी ओर जाने की कोशिश करने लगे जबकि एक युवा प्रदर्शनकारी ने ट्रैक्टर से अवरोधक को तोड़ने की कोशिश की। सूत्रों ने बताया कि इसके बाद पुलिस ने उन्हें सीमा पर रोकने के लिए पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
जोगिंदर सिंह उगराहां समेत कुछ एसकेएम नेताओं ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में कुछ किसान घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण ढंग से मार्च करना चाहते थे और पंजाब के राज्यपाल-सह-केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक को एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
पुलिस कार्रवाई के बाद मोहाली में किसानों की एक सभा को संबोधित करते हुए एसकेएम के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने घोषणा की कि किसान शनिवार को पूरे पंजाब में पंजाब के राज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुतले जलाएंगे। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई तय करने के लिए 21 मई को विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं की बैठक होगी।
एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी भी है, ''लेकिन आज हमें राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने से भी रोक दिया गया।''
किसानों ने मांग की कि नदी जल मुद्दे को नदी-तटीय बेसिन सिद्धांत के अनुसार हल किया जाना चाहिए क्योंकि पंजाब वह राज्य है जिससे होकर नदी बहती है और उसे पहला अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 78, 79 और 80 को निरस्त करने की मांग की क्योंकि इन धाराओं के तहत पंजाब के जल पर नियंत्रण केंद्र सरकार के पास है।
प्रदर्शनकारियों ने बांध सुरक्षा अधिनियम और जल संशोधन अधिनियम 2024 को निरस्त करने की मांग की और दावा किया कि ये कानून राज्यों के जल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
किसानों ने केंद्र सरकार से अमेरिका के साथ ''कृषि विरोधी मुक्त व्यापार समझौता'' करने के निर्णय को रद्द करने की भी अपील की।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के नियमों में संशोधन के जरिये पंजाब की स्थायी सदस्यता को समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश
1505 1947 चंडीगढ़