संविधान और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने की जरूरत: माकपा
रवि कांत दिलीप
- 01 Jul 2024, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को कहा कि संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, संघवाद और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करना होगा और वामपंथी दल इस कार्य को अपने हाथ में लेगा।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने 28 से 30 जून तक यहां आयोजित अपनी केंद्रीय समिति की बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक बड़ा झटका है।
माकपा ने अपने बयान में कहा कि देश की जनता ने संविधान और भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक चरित्र की रक्षा करने की अपनी इच्छाशक्ति पर जोर देते हुए तथा तेजी से गिरती आजीविका की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत न मिले।
माकपा ने कहा, ‘‘ इन प्रतिकूल परिणामों और गठबंधन के तहत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार बनाने के लिए मजबूर होने के बावजूद, भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आधिपत्य को पुनः स्थापित करने के लिए अथक प्रयास शुरू कर दिया। इस तथ्य को देखते हुए कि इसके कुल मत प्रतिशत में मामूली रूप से एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, यह हिंदुत्व चेतना को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ’’
इसमें आरोप लगाया गया है कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और तेज करने के लिए चुनाव परिणाम घोषित होने के दिन से ही मुसलमानों के खिलाफ हमलों की एक श्रृंखला शुरू कर दी गई है, जबकि विपक्ष को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
वाम दल ने कहा कि पिछले सत्र में करीब 150 सांसदों को निलंबित करने वाले ओम बिरला को दोबारा लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित कराकर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि मोदी के शासन में सब कुछ पहले जैसा ही चल रहा है।
माकपा ने कहा, ‘‘ इन परिस्थितियों में, केंद्रीय समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि भारतीय संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, संघवाद और लोगों की नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्षों के साथ-साथ भारतीय जनता के विशाल बहुमत के लिए बेहतर आजीविका के संघर्षों को संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह तेज करना होगा। माकपा इस कार्य को धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक दलों के साथ मिलकर तथा देश भर में स्वतंत्र रूप से करेगी।’’
भाषा रवि कांत