केसी वेणुगोपाल: नहीं मिला मुख्यमंत्री का पद, पर और बढ़ सकता है पार्टी में कद
माधव
- 14 May 2026, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
(संजीव चोपड़ा)
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में 'केसी' को खारिज नहीं कर सकते। केरल के मुख्यमंत्री पद का फैसला होने के बाद पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बृहस्पतिवार को यह चर्चा आम थी।
कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भले ही मुख्यमंत्री पद हासिल करने में कामयाब नहीं हो सके, लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी में उनका कद और बढ़ सकता है।
पार्टी नेतृत्व ने वी डी सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। कांग्रेस को इस निर्णय पर पहुंचने में 10 दिन लग गए। इस निर्णय में देरी का एक प्रमुख कारण वेणुगोपाल की दावेदारी थी क्योंकि वह पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस में एक शक्तिशाली नेता और राहुल गांधी के करीब हैं।
इस पद के लिए तीन मुख्य दावेदार सतीशन, वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला थे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और पार्टी की केरल इकाई में कांग्रेस के नेताओं में यह चर्चा आम है कि वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी और राहुल गांधी ने उन्हें संगठन महासचिव की भूमिका में बने रहने के लिए मनाने में कुछ दिनों का समय लिया।
कांग्रेस में कुछ लोग इसे वेणुगोपाल की हार के रूप में भी देख रहे हैं।
माना जा रहा है कि वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही नहीं मिल पाई हो, लेकिन आने वाले दिनों में वह और मजबूत होकर उभरेंगे।
केरल कांग्रेस के एक नेता ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''लोग कहेंगे कि उन्होंने अपना दावा छोड़ दिया, भले ही वह अंतिम फैसले को प्रभावित कर सकते थे।''
केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सतीशन के नाम की घोषणा के तुरंत बाद, वेणुगोपाल ने उन्हें बधाई देते हुए एक बयान दिया और कहा कि वह उन्हें और यूडीएफ सरकार को पूरा समर्थन प्रदान करेंगे।
संसद में उनकी भूमिका भी बढ़ने की संभावना है क्योंकि उनके आलोचक भी परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक को पारित होने से रोकने में पूरे विपक्ष के समर्थन के प्रबंधन में उनकी भूमिका को मानते हैं।
अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में उनकी भूमिका का विस्तार हो सकता है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ''किसी को भी केसी को कम नहीं आंकना चाहिए।''
एक अन्य नेता ने कहा कि केरल के फैसले के बाद पार्टी के भीतर ''वेणुगोपाल फैक्टर'' और बढ़ेगा।
नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच 'केसी' नाम से पुकारे जाने वाले वेणुगोपाल पहली बार 2009 में अलाप्पुझा से लोकसभा सदस्य चुने गए।
विनम्र व्यवहार और चेहरे पर अक्सर चिरपरिचित मुस्कान वाले वेणुगोपाल को टकराव से दूर रहकर और अपनी ताकत का प्रदर्शन किए बिना काम करने वाला नेता माना जाता है।
वह मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री थे।
इसके बाद जनवरी, 2019 में वेणुगोपाल अचानक कांग्रेस के राष्ट्रीय फलक पर आ गए जब तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अशोक गहलोत के पद से हटने के बाद उन्हें संगठन महासचिव बनाया।
इस भूमिका में आने के बाद से मानो वह राहुल गांधी की परछाई बन गए।
वर्ष 2019 में राहुल गांधी को दो सीटों उत्तर प्रदेश की अमेठी और केरल की वायनाड चुनाव लड़े तो इसके पीछे भी वेणुगोपाल का रणनीतिक सुझाव था। राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए थे और वायनाड से निर्वाचित हुए थे।
कहा जाता है कि वेणुगोपाल को कार्यकर्ताओं के जरिये अमेठी में भाजपा की स्मृति ईरानी से राहुल गांधी की संभावित हार के बारे में बताया गया और फिर उन्होंने अपने नेता के चुनावी भविष्य को बचाने के लिए आगे की योजना बनाई थी।
इससे उन पर राहुल गांधी का विश्वास और बढ़ गया।
राहुल गांधी के लिए वेणुगोपाल का निरंतर महत्व हाल ही में फिर से उस वक्त स्पष्ट हुआ जब कांग्रेस ने संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के रूप में उनके नामांकन की सिफारिश की। वेणुगोपाल अब लगातार दूसरे वर्ष इस समिति का नेतृत्व कर रहे हैं।
कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी ने केरल से जुड़े फैसले में वेणुगोपाल को यह संकेत दिया है कि केंद्र में अब भी उनकी जरूरत है।
भाषा हक हक माधव
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1405 1707 दिल्ली